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बिहार में नितीश कुमार के कार्य से आप

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परबत्ता प्रखंड से हर्ष राज की रिपोर्ट
परबत्ता प्रखंड़ अंतर्गत देवरी पंचायत के अररिया गाँव में बीते बुधवार को स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर उस वक्त खुशी का माहौल गम में बदल गया, जब
होमगार्ड का सिपाही 50 बर्षीय ब्रजकिशोर यादव को पड़ोसियों के द्वारा मारपीट करने के क्रम में सर में ईट लगने से मौके पर मृत्यु हो गयी।मिली जानकारी के मुताबिक ब्रजकिशोर यादव का पुत्र बबलू यादव से रूपया को लेकर बबलू यादव से कई दिनों से विवाद चल रहा था।15 अगस्त के दिन करीब 9 बजे पिता के अनुपस्थित में दोनों गुट में आपस में लड़ाई हुई।ग्रामीणों के सहयोग से दोनों पक्षों को समझा बुझाकर  लड़ाई को शांत करा दिया गया।कुछ देर बाद ब्रजकिशोर यादव घर आया तो मारपीट  की जानकारी मिली।उन्होंने अपने पुत्र को समझाने लगा और शाम तक विवाद को हल करने का आश्वासन दिया।
इतना कहने के बाद अपने ड्यूटी गोगरी नारायणपुर बांध पर पुत्र बबलू यादव के साथ मोटरसाइकल पर सवार होकर जाने लगा।जैसे ही दीपक यादव,सौरभ कुमार व मंजय यादव के घर के पास पहुँचा,पहले से घात लगाये बैठे तीनों लड़के ने ईट और लाठी से हमला कर दिया।इस घटना में ब्रजकिशोर यादव व बबलू यादव सर में ईट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।होमगार्ड ब्रजकिशोर यादव चोट लगते ही मोटरसाइकल से नीचे गिरते ही मौके पर मृत्यु हो गया।वहीं खून से लथ पथ बबलू यादव मड़ैया पुलिस को सूचना देने थाना चला गया।सूचना मिलते ही मड़ैया थानाध्यक्षक राजकुमार साह सशस्त्र बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया।परिजनों से पुलिस को आक्रोश का सामना करना पड़ा एवं वरीय पदाधिकारी को बुलाने की मांग करने लगा।करीब दो घंटे बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी प्रमोद कुमार झा घटनास्थल पर पहुँचते ही आक्रोशित पुलिस के द्वारा आरोपियों के घर में पड़े समान बर्तन,आनाज चूल्हा,चौकट को बुरी तरस से छतिग्रस्त किया गया।काफी मकस्त के बाद करीब 2बजकर 30मिनट में पुलिस के द्वारा लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर हॉस्पिटल खगड़िया भेजा गया।मड़ैया थानाध्यक्षक राजकुमार साह ने बताया ग्यारह व्यक्ति को नामजाद अभियुक्त बनाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है मड़ैया पुलिस की निष्क्रियता के चलते गाँव में गांजा व शराब तस्करी का बोलबाला हो गया है।इन तस्कर को पुलिस से भय नहीं है। ओर वह लोग खुले आम तस्करी को अनजान दे रहे है
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भारतीय राजनीति में शुचिता के प्रति देश के
पूर्व प्रधानमंत्री वक्त कवि अटल बिहारी वाजपेई के निधन पर बिहार के बेगूसराय जिले के भरौल निवासी समाजसेवी सुभाष कुमार ईश्वर कंगन की कलम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

"दुनियाँ के सियासत में दुबारा कोई 'अटल' नहीं होगें"

भारतीय सियासत के शिखर पुरुष सदी के सबसे बडे महानायक आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी बिमार हालत में हैं,हो सकता है सदा के लिये दूर जा सकते हैं,लेकिन दिल से दूर नहीं हो सकते,इन्होंने राजनीति की जो दिशा दिखाई है वह युग-युगांतर तक महान गाथा गाते रहेंगे,आज के सियासी सफर में हर कदम पर करोड़ो-अरबो लुटाने बाले को सिख लेने की जरूरत है..

यूपी की बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे एक 37 वर्षीय नौजवान सांसद ने 1962 के चीन युद्ध में भारत की शर्मनाक पराजय के बाद संसद में बोलते हुए तत्कालीन कांग्रेसी सरकार और उसके मुखिया प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों की धज्जियां उड़ा दी थी.। 

उस नौजवान के सम्बोधन से प्रभावित हुए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू स्वयं को रोक नहीं सके थे और उस नौजवान की सीट पर जाकर उसको बधाई देते हुए बोले थे कि तुम एक दिन इस देश के प्रधानमंत्री बनोगे.।

34 साल बाद नेहरू की वो भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई थी.। उस नौजवान का नाम था अटल बिहारी वाजपेयी जो 1996 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे.।

1984 से लेकर 2004 में लखनऊ में सम्पन्न हुई , उनकी अंतिम जनसभा तक अटल जी की लगभग 70-80 चुनावी रैलियों, जनसभाओं, नुक्क्ड़ सभाओं, तथा लगभग दर्जन भर पत्रकार वार्ताओं में उनको बोलते हुए प्रत्यक्ष देखा-सुना है.। टीवी और रेडियो पर भी उनके भाषण साक्षात्कार खूब देखे सुने, 
लेकिन अटल जी का एक भी ऐसा साक्षात्कार या भाषण मुझे याद नहीं,  जिसमे उन्होंने खुद अपनी प्रशंसा में एक लाइन भी कभी बोली हो.। इसके बजाय अपनी किसी परिस्थितिजन्य राजनीतिक लाचारी पर नटखट मुस्कुराहट के साथ खुद पर ही व्यंग्य करते हुए मैंने उन्हें कई बार देखा सुना है.। 

अटल जी इतने विराट राजनीतिक व्यक्तित्व के स्वामी थे कि विपक्ष भी उनके खिलाफ कभी कोई व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचता था.।

 स्व.नरसिम्हा राव और स्व. चंद्रशेखर सरीखे भारतीय राजनीति के दिग्गज उन्हें सार्वजनिक रूप से अपना राजनीतिक गुरु कहते और स्वीकारते थे.। 

1999 में जब एक वोट से अटल सरकार गिर गयी थी तब स्व.चंद्रशेखर ने कहा था कि यदि मुझे यह मालूम होता कि सरकार एक वोट से गिरने जा रही है तो मैं अपना वोट अटल जी की सरकार के पक्ष में देता.। 
    
विपक्ष में रहते हुए जगुआर विमान सौदे में मुद्रा असंतुलन की जटिल उलझन सुलझाने का मामला रहा हो या संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि बनकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने का मामला रहा हो.। अटल जी की ख्याति के सागर में उमड़ने वाली उनकी प्रशंसा की गगनचुम्बी लहरें दलीय सीमाओं के बाँध तोड़ देती थीं।

भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न सैन्य शक्ति बनाने वाले अटल जी को देश कैसे भूल जाएगा.?

1998 में जब अटल जी ने देश की कमान संभाली थी उस समय देशवासी 16 रुपये प्रति मिनट आउटगोइंग और 8 रुपये प्रति मिनट इनकमिंग प्रति कॉल की दर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते थे। मोबाइल हैंडसेटों का न्यूनतम मूल्य 25 हज़ार होता था। 

मई 2004 में जब अटल जी ने सत्ता छोड़ी थी तो देशवासी 2 हज़ार रुपये के मोबाइल हैंडसेट के साथ 1 रुपये प्रति मिनट आउटगोइंग की दर से मोबाइल सेवाओं का उपयोग कर रहे थे। इनकमिंग कॉल की वसूली इतिहास के पन्नों में दफन हो चुकी थी।

भारतीय इतिहास में अटल जी अकेले ऐसे शासक हैं, जिन्होंने सब सुविधाओं से सुसज्जित विशालकाय सड़कों वाले भारत की अपनी कल्पना को अपने कार्यकाल में ही स्वर्णिम चतुर्भुज नाम की अपनी योजना को धरातल पर क्रियान्वित कर दिखाया था। मेरी या मुझसे पहले की पीढ़ी भलीभांति यह जानती है कि भारतीय राजनीति के उस "अटल काल" से पहले भारतीय सड़कों की स्थिति कितनी दयनीय और दरिद्र थी।

ऐसी अनेक उपलब्धियां हैं अटल जी के खाते में। यह उपलब्धियां इसलिए अत्यंत विलक्षण हो जाती हैं क्योंकि परमाणु परीक्षण के पश्चात लगे और लम्बे समय तक चले वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने यह उपलब्धियां अपनी उस सरकार के माध्यम से प्राप्त की थीं जो गठबन्धन के 26 सहयोगियों की बैसाखियों पर टिकी हुई थी। लेकिन 2004 में सत्ता से जाते समय 8% की विकास दर की विरासत अटल जी छोड़कर गए थे।

यह संक्षिप्त विवरण बता देता है कि अटल जी क्या थे कैसे थे.?
यह संक्षिप्त विवरण यह भी शंखनाद कर रहा है कि अटल जी जैसा ना कोई था, ना कोई है, ना कोई होगा...

अन्त में , 
""अटल बिहारी वाजपेयी जी 
                     को शत् शत् नमन 
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सिंघीया में कन्यादान का चेक वितरण


सिंघीया प्रखण्ड कार्यालय में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी मनोरमा कुमारी ने शिवर लगा कर विवाहित कन्याओं  को चेक वितरण की है ।बीडीओ ने बताइ
कि सामान्य कोटि में 645 कन्या एवम विशेष कोटि में 55 कन्याओं  को पांच पांच हजार राशि की   चेक वितरण की है  जिसमे सिंघीया एक के काजल कुमारी ,अंगूरी खातून,प्रियंका देवी,खात्मा खातून ,सबाना खातून ,रंजू देवी रूपम देवी बिना देवी समेत कई लोगो को चेक दिया गया
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अटल जी के निधन के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी है। वहीं उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में शुक्रवार को स्कूलों और कॉलेज में छुट्टी की घोषणा भी कर दी गई है

चीफ एडिटर ,कृष्ण कुमार  संजय :


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद गुरुवार शाम 5:05 बजे एम्स दिल्ली में निधन हो गया। एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि गहरे शोक के साथ हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की सूचना दे रहे हैं। अटल जी के निधन के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी है। वहीं उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में शुक्रवार को स्कूलों और कॉलेज में छुट्टी की घोषणा भी कर दी गई है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर राज्य में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस अवधि में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज झुके (हाफ मास्ट) रहेंगे। अटल जी के सम्मान में राज्य सरकार ने 17 अगस्त, 2018 का राजकीय अवकाश घोषित किया है। शुक्रवार सभी सरकारी कार्यालय व स्कूल बन्द रहेंगे। राजकीय शोक के दौरान सरकारी स्तर पर किसी तरह का मनोरंजक कार्यक्रम, सामूहिक भोज आदि पर रोक रहेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार के जारी सर्कुलर को सभी जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष को भेज कर इसी आधार पर कार्यवाही करने को कहा है।
बिहार सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में सात दिन का शोक और 17 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में 17 अगस्त को उत्तराखंड के सभी राजकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और अर्द्ध सरकारी कार्यलय बंद रहेंगे।
दिनभर एम्स में लगा रहा नेताओं का तांता
भाजपा और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का आज दिनभर एम्स में तांता लगा रहा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विभिन्न केन्द्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य नेता उन्हें देखने एम्स पहुंचे। असम के मुख्यमंत्री सवार्नंद सोनोवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई राजनेता अपने कार्यक्रम बीच में छोडकर दिल्ली पहुंचे।
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डॉक्‍टरों ने बताया- निमोनिया से पीड़ित थे वाजपेयी

चीफ एडिटर ,कृष्ण कुमार संजय :

एक चिकित्सक ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, “वह निमोनिया से पीड़ित थे और गुर्दा सहित उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.
एम्स के चिकित्सकों के मुताबिक  उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. उन्होंने कहा कि 93 वर्षीय वयोवृद्ध नेता को उनके जीवन के अंतिम दिन एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजिनेशन (ईसीएमओ) सपोर्ट पर रखा गया था.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने गुरुवार को वाजपेयी के निधन की घोषणा की. पूर्व प्रधानमंत्री को कई समस्याओं को लेकर 11 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एक चिकित्सक ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, “वह निमोनिया से पीड़ित थे और गुर्दा सहित उनके कई प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. उन्हें अंतिम दिन ईसीएमओ सपोर्ट पर रखा गया था.”एसीएमओ के जरिए ऐसे मरीजों को दिल और श्वसन संबंधी सपोर्ट दिया जाता है, जिनके हृदय और फेफड़े सही तरीके से अपना काम नहीं कर पाते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री को गुर्दे और मूत्र नली के संक्रमण, कम मूत्र होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
वाजपेयी मधुमेह से पीड़ित थे और उनका केवल एक गुर्दा ही काम कर रहा था. वर्ष 2009 में उन्हें आघात लगा था जिससे उनकी संज्ञानात्मक क्षमताएं कमजोर हो गयी थीं. और कुछ समय बाद उन्हें डिमेंशिया हो गया था. देश के सबसे करिश्माई नेताओं में से एक वाजपेयी का गुरुवार को एम्स में निधन हो गया. वह 93 साल के थे.

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खगड़िया जिला से हर्ष राज की रिपोर्ट
खगड़िया जिला के गोगरी प्रखंड अन्तर्गत गौछारी ग्राम में गुरुवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने जैसे ही अपने प्रिय नेता अटल बिहारी बाजपेयी जी के निधन की जानकारी सुनी । सबने फौरन ही
शोक सभा आयोजित कर अपने लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री जी को श्रद्धांजली दी ।देश के प्रधानमंत्री के साथ साथ शानदार कवि,ओजस्वी वक्ता रहे अटल जी अपने जीवनकाल में ही भारत रत्न से सम्मानित हुए।इस सबसे अलग आम लोगों तथा सभी राजनीतिक दलों में समान रुप से सम्मान पाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने जो सम्मान प्राप्त किया वह किसी को नही मिलता।वह सभी के लिए सम्मानित हैं।वह सभी को प्रिय है।इसके अलावा मुझे नही लगता कोई व्यक्ति ईश्वर से कुछ और भी चाहता होगा।लम्बे समय से गम्भीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद मृत्यु को इंतज़ार के लिए कह दिया।शायद उन्हें भाजपा का यह स्वर्णिम युग देखने का इंतज़ार था।मात्र दो सांसदों वाली पार्टी को विश्व की सबसे बड़े राजनैतिक दल के रूप में अटल जी जीवित शरीर से देख पाए।शायद उनके इस आग्रह को ईश्वरीय देव दूतों ने भी स्वीकार कर लिया लेकिन अब विदाई  है, वही भाजपा नेता अरुण कुमार शर्मा उर्फ लड्डू जी ने कहा कि
अंत में अटल जी की इन पंक्तियों के साथ उन्हें नमन करता हूँ। 
"मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?" 
अश्रुपूर्ण श्रदांजलि । शोक सभा में शामिल भाजपा जिला अध्यक्ष श्री अर्जुण कुमार शर्मा; बिभाग बिस्तारक प्रमुख प्रदुमन श्रीवास्तव; अरुण कुमार शर्मा (लड्डुजी) जिला उपाध्यक्ष; दीवाकर पासवान; कुलदीप आनन्द; राज कमल दिवाकर; राजेन्द्र मंडल; अजय चौरसिया ;अरबिन्द सिंह; अनिल शर्मा; सुनिल मुखर्जी; उमेश चौरसिया; आलोक मिश्रा;सुजीत यादव;शुकदेव मुनी;राजकिशोर चौधरी;बिजय पासवान; अभिषेक आनन्द; कन्हैंया सिंह; किशोर सिंह; रुपक राज; लड्डु तॉती; कैलाश साह; बिनोद चौरसिया ओर ग्रामीण मौजूद थे
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  बिहार के पंचायती राज डिपार्टमेंट ने इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बंपर भर्तियां 

बिहार के पंचायती राज डिपार्टमेंट ने इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बंपर भर्तियां निकाली हैं. बिहार सरकार ने विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए 4,192 भर्तियां निकाली हैं. भर्ती प्रक्रिया 'मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना' और 'मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना' के तहत चलाई जा रही है.


पदों का विवरण
पोस्ट: टेक्निकल असिस्टेंट अकाउंट-कम-आईटी- असिस्टेंट
कुल पद: 4,192
कुल पद: 4,192

किस पोस्ट के लिए कितनी भर्तियां
- टेक्निकल असिस्टेंट के लिए 2096 भर्तियां.
- अकाउंट-कम-आईटी- असिस्टेंट के लिए 2096 भर्तियां.

उम्र सीमा
इन पदों के लिए पुरुष उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र सीमा 37 साल और महिलाओं के लिए 40 साल रखी गई है.
शैक्षणिक योग्यता
- टेक्निकल असिस्टेंट: उम्मीदवार के पास पोलीटेक्निक इंस्टीट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होना चाहिए.
- अकाउंट-कम-आईटी-असिस्टेंट: उम्मीदवार के पास यूजीसी से मान्यता प्राप्त किसी कॉलेज या इंस्टीट्यूट से B.Com/M.Com की डिग्री होनी चाहिए.

कैसे और कब तक कर सकते हैं अप्लाई
उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट biharprd.bih.nic.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि इन पदों पर कब तक आवेदन कर सकते हैं, इसका ऑफिशियल नोटिफिकेशन में कोई जिक्र नहीं किया गया है.

सैलरी
- टेक्निकल असिस्टेंट: उम्मीदवारों को कॉन्ट्रैक्ट बेस पर रखा जाएगा और 27,000 प्रति माह सैलरी दी जाएगी.
- अकाउंट-कम-आईटी-असिस्टेंट: उम्मीदवारों को कॉन्ट्रैक्ट बेस पर रखा जाएगा और 20,000 प्रति माह सैलरी दी जाएगी.