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बिहार में नितीश कुमार के कार्य से आप

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दिनकर_की_पुण्यतिथि_पर_विशेष
अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने हिंदी साहित्य में न सिर्फ वीर रस के काव्य को एक नयी ऊंचाई दी, बल्कि अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का भी सृजन किया.इसकी एक मिसाल 70 के दशक में संपूर्ण क्रांति के दौर में मिलती है. दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने हजारों लोगों के समक्ष दिनकर की पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का उद्घोष करके तत्कालीन सरकार के खिलाफ विद्रोह का शंखनाद किया था.दिनकर का जन्म 23 सितंबर, 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले में हुआ. हिंदी साहित्य में एक नया मुकाम बनाने वाले दिनकर छात्रजीवन में इतिहास, राजनीतिक शास्त्र और दर्शन शास्त्र जैसे विषयों को पसंद करते थे, हालांकि बाद में उनका झुकाव साहित्य की ओर हुआ. वह अल्लामा इकबाल और रवींद्रनाथ टैगोर को अपना प्रेरणा स्रोत मानते थे. उन्होंने टैगोर की रचनाओं का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद किया.

दिनकर का पहला काव्यसंग्रह ‘विजय संदेश’ वर्ष 1928 में प्रकाशित हुआ. इसके बाद उन्होंने कई रचनाएं की. उनकी कुछ प्रमुख रचनाएं ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, ‘हुंकार’ और ‘उर्वशी’ हैं. उन्हें वर्ष 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया.

पद्म भूषण से सम्मानित दिनकर राज्यसभा के सदस्य भी रहे. वर्ष 1972 में उन्हें ज्ञानपीठ सम्मान भी दिया गया. 24 अप्रैल, 1974 को उनका देहावसान हो गया. दिनकर ने अपनी ज्यादातर रचनाएं ‘वीर रस’ में कीं. इस बारे में जनमेजय कहते हैं, ‘भूषण के बाद दिनकर ही एकमात्र ऐसे कवि रहे, जिन्होंने वीर रस का खूब इस्तेमाल किया. वह एक ऐसा दौर था, जब लोगों के भीतर राष्ट्रभक्ति की भावना जोरों पर थी. दिनकर ने उसी भावना को अपने कविता के माध्यम से आगे बढ़ाया. वह जनकवि थे इसीलिए उन्हें राष्ट्रकवि भी कहा गया.’

देश की आजादी की लड़ाई में भी दिनकर ने अपना योगदान दिया. वह बापू के बड़े मुरीद थे. हिंदी साहित्य के बड़े नाम दिनकर उर्दू, संस्कृत, मैथिली और अंग्रेजी भाषा के भी जानकार थे. वर्ष 1999 में उनके नाम से भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया.
पलटन साहनी की रिपोर्ट
समस्तीपुर जिला के रोसड़ा अनुमंडल
रोसड़ा जेई (शहरी) डब्लू महतो ने थाने को आवेदन देकर बिजली चोरी की प्राथमिकी दर्ज करायी है। जिसमें शहर के ब्लॉक रोड स्थित एक इलेक्ट्रिक रिपेयरिंग दुकान के संचालक मो. आलम को आरोपित किया है। जिस पर टोका फंसा कर चोरी से बिजली उपयोग किये जाने का आरोप लगाया गया है।

जेई ने कहा है कि विशेष छापेमारी अभियान के तहत उक्त दुकान पर पहुंचा तो देखा कि टोका फंसा कर चोरी से बिजली का उपयोग किया जा रहा है। उन्होने आवेदन में कहा है कि बिजल चोरी से विभाग को करीब 19,546 रूपये की क्षति का होना बताया गया है। उक्त राशि लोड के अनुसार आकलित कर निर्धारित की गयी है। वहीं मौका ए वारदात से बिजली से उपभोग की जा रही सामाग्रियों को भी जब्त कर लिया गया है। इस संबंध में रोसड़ा इंस्पेक्टर अमित कुमार ने बताया कि भारतीय विधुत अधिनियम 2003 के तहत मामला दर्ज कर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
2002 गुजरात दंगा: बिलकिस बानो केस में ।सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगा मामला में गुजरात सरकार से गैंगरेप पीड़िता बिलकिस बानो को 50 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए कहा है। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने गुजरात सरकार को पीड़िता को सरकारी नौकरी के साथ-साथ सरकारी आवास भी देने का आदेश दिया है। बताते चलें कि, बानो के साथ 2002 के दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। उस समय वह गर्भवती थी।

गुजरात
सरकार ने बिलकिस बानो को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये देने का प्रस्‍ताव दिया था, जिसे उन्‍होंने ठुकरा दिया। आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मुआवजा राशि तो बढ़ाकर 10 गुना कर दिया।

इससे पहले इस मामले में शुक्रवार (29 मार्च) को गुजरात सरकार निर्देश दिया कि 2002 के बिलकिस बानो मामले में दोषी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने चार मई 2017 को आईपीसी की धारा 218 (अपनी ड्यूटी का निर्वहन ना करने) और धारा 201 (सबूतों से छेड़छाड़ करने) के तहत पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों को दोषी ठहराया था।
साजिश_के_शिकार_पवन_सिंह

अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी ने दिल खोलकर भोजपुरी सिनेस्टारो को चुनावी मैदान में उतारा है नई दिल्ली से मनोज तिवारी उत्तर प्रदेश से दिनेश लाल यादव निरहुआ और रवि किशन को चुनावी मैदान में उतारा गया है रवि किशन दिनेश लाल निरहुआ और मनोज तिवारी से ज्यादा लोकप्रिय भोजपुरी स्टार पवन सिंह को भाजपा में इसी शर्त पर शामिल कराया गया था कि उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट दिया जाएगा.बात जब बिहार में नहीं बनी तो उन्हे उत्तर प्रदेश के भदोही या पश्चिम बंगाल के आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाने की बात चल रही थी सूत्रों की मानें तो अंततः पश्चिम बंगाल के ही एक ऐसे सीट से पवन सिंह को उम्मीदवार बनाने का फाइनल निर्णय भाजपा ले चुकी थी जहां बिहारियों की तादाद ज्यादा है लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा में भोजपुरी सिनेमा का तथाकथित ठेकेदार बने व्यक्ति ने सुनियोजित साजिश के तहत पवन सिंह का टिकट कटवा दिया ऐसी चर्चा पटना से लेकर दिल्ली तक है.दबी जुबान में चर्चा है कि राजपूत जाति से होने के कारण पवन  कई लोगों की आंखों के काँटा बने हुए है. हद तो यहां तक हो गई है कि पवन सिंह और कल्पना जैसे भोजपुरी के सुपरस्टार गायक भाजपा में होने के बावजूद एक व्यक्ति विशेष के अहंकार के कारण इन दोनों को पार्टी के स्टार प्रचारक के सूची तक में शामिल नहीं किया गया है.
संचिता बनर्जी और किशन राय मुँगरा बादशाहपुर में
 

सुपरडुपर भोजपुरी फिल्म निरहुआ हिन्दुस्तानी 2 एवं  क्रेक फाईटर में अपने अदाकारी का जलवा बिखेर चुकी संचिता बनर्जी इन दिनों स्टाइलिश अभिनेता किशन राय के साथ उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर के मुँगरा बादशाह पुर में भोजपुरी फिल्म मेरे प्यार से मिला दे की शूटिंग में व्यस्त हैं। राय फिल्म्स इंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्मित की जा रही इस फिल्म का भव्य पैमाने पर मुहूर्त करके शूटिंग शुरू कर दी गई है। यह फिल्‍म बेहद सामाजिक और पारिवारिक परिवेश में निर्मित की जा रही है। इस फिल्म में भोजपुरी माटी की मधुरता, रीति-रिवाज, भोजपुरिया संस्कार का समावेश देखने को मिलेगा। यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा की दशा और दिशा को बदलने में महत्त्पूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस फिल्म में किशन राय सोलो हीरो लांच हो रहे हैं। इसके पहले वे कई फिल्मों में सहायक नायक की भूमिका में आ चुके हैं। मेगास्टार रवि किशन के साथ सबसे बड़ा चैम्पियन में नज़र आने वाले वाले हैं। बात करें फिल्म  मेरे प्यार से मिला दे की तो इस फिल्म में किशन राय के साथ संचिता बनर्जी रोमांटिक भूमिका में नजर आने वाली हैं। वे दोनों कॉलेज स्टूडेंट की भूमिका में हैं। उनकी रोमांटिक जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आने वाली है। इस फिल्म से नवोदित अदाकारा प्राची सिंह को लांच किया है, वे भी सशक्त भूमिक में नजर आने वाली हैं। इस फ़िल्म के निर्माता गोपाल राय हैं, जोकि एक अच्छे अभिनेता भी हैं। उनका लुक और कद-काठी देखकर लोग उन्हें भोजपुरिया अमिताभ बच्चन भी कहते हैं। फिल्म के निर्देशक चंदन सिंह हैं, जिन्होंने अब तक कई बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया है। फिल्म के लेखक अनिल विश्वकर्मा, संगीतकार मुन्ना दूबे, अजीत मंडल, राम शुक्ला हैं। छायांकन डीके शर्मा, नृत्य कानू मुखर्जी, मारधाड़ नबा शुब्बू (हैदराबाद) का है। कार्यकारी निर्माता विजय मौर्या हैं।  मुख्य कलाकार किशन राय, संचिता बनर्जी, प्राची सिंह, उमेश सिंह, अशी तिवारी, अनूप अरोरा, लोटा तिवारी, महेश आचार्य, अवधेश उज्जैन, सोनिया मिश्रा, पुष्पा शुक्ला, रमजान शाह, संजय राज आदि हैं।
नीतीश कुमार ने विपक्ष पर कसा तंज,कहा हर घर बिजली पहुंच गई अब लालटेन की जरूरत नहीं।

*सीएम ने कहा देश में चाहिए मजबूत सरकार।*

विभूतिपुर (समस्तीपुर) : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुर्गा स्थान मैदान सिंघियाघाट विभूतिपुर में जन सभा को संबोधित करते हुए कहा की राज्य को पिछड़ेपन से निकालने के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की जरूरत है। केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार विकास के पथ पर अग्रसर है।गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है वही मनोबल भी बढा है।केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं लोगों के जीवन स्तर में काफी मददगार साबित हुई है। राजद पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 साल पति-पत्नी की सरकार रही लेकिन बिहार का विकास नही हुआ।उन्होंने अपने 13 साल में किए कामों को गिनाया और पूछा-कहां विकास नही हुआ है? घर-घर बिजली पहुंच गयी है। तो लालटेन और ढिबरी की क्या जरूरत है।साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब बिहार में पति-पत्नी का राज था तब यहां अंधेरा कायम था और अब राज्य में बिजली आ गई है इसलिए अब लालटेन की जरूरत नहीं है।
साथ ही मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की तारीफ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की इज्जत व प्रतिष्ठता बढ़ायी है। मुख्यमंत्री ने सात निश्चय योजना पर भी अपनी बातें रखी और कहा कि एक-एक गली का पक्कीकरण किया जा रहा है। 31 दिसंबर 2018 तक हर घर बिजली देने का वादा किया था।यह वादा अक्तूबर 18 में ही पूरा हो गया। बिहार देश का पहला राज्य है। जहां चुनाव में महिलाओ को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। वहीं जीविका योजना के तहत एक करोड़ महिलाओं को स्वयं-सहायता समूह से जोड़ा गया है। उन्होने कहा की पहले बिहार में सात सौ मेगावाट बिजली खपत होती थी जबकि आज बिहार मे 52 मेगावाट बिजली खपत हो रही है। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा उनकी सरकार शिक्षा की दिशा में उनकी सरकार लगातार काम कर रही है। पोशाक व साइकिल की योजना के बाद विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है। 2008 में एक लाख 70 हजार बच्चे स्कूल आते थे अब इसकी संख्या नौ लाख से अधिक हो गयी है। साथ ही नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत योजना से गरीबों को जोड़ दिया गया है। इसका लाभ सीधे गरीबों को मिलता है। दूसरे नेता कहते हैं किसान का कर्ज माफ कर देंगे।
क्या हर किसान कर्ज लेता है?उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई किया। जिससे देशवासियों का मनोबल ऊंचा हुआ है।सीएम ने कहा कि लोगों की सेवा व राज्य का विकास ही सरकार का उद्देश्य है। साथ ही सीएम नीतीश ने कहा कि अब सूबे में खाद की किल्लत नहीं होगी। बरौनी में खाद का उत्पादन होगा और यहां से दूसरे राज्य के किसान भी लाभ उठायेंगे। वही चुनावी जन सभा को संबोधित करते हुए एनडीए के उमीदवार नित्यानंद राय के पक्ष में वोट दे कर जिताने की अपील की।
मंच की अध्यक्षता भाजपा मंडल अध्यक्ष अमन पराशर, जदयू प्रखंड अध्यक्ष प्रभुनारायण राय, लोजपा अध्यक्ष सिबाजी प्रशाद,अरविंद कुमार,बाबुसाहेव झा संयुक्त रूप से किया। मंच पर कृषि मंत्री प्रेम कुमार,राज्य सभा सांसद राकेश सिन्हा,राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर,जिला अध्यक्ष सह पूर्व सांसद अश्मेघ देवी,भाजपा जिला अध्यक्ष रामसुमिरन सिंह,महामंत्री उपेंद्र कुशवाहा, बिधान पार्षद राणा गंगेश्वर,हरि नारायण चौधरी, पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री बैधनाथ सहनी,पूर्व मंत्री राम लखन महतो,तखी अख्तर, अनस रिजवान,जिला पार्षद रीना राय,रामबहादुर सिंह,गुंजन मिश्रा, बिमला सिंह,चांदनी देवी,तरुण सिंह,नरेश प्रभाकर,रामाशीष महतो,बबलू सिंह,रणधीर रॉय, मुरारी झा दिनेश ठाकुर सहित कई लोग मौजूद थे।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा गुर्जर आरक्षण का मामला, गहलोत सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर

जयपुर/ लोकसभा चुनाव से पहले गुर्जरों के आंदोलन को देखते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार ने विधानसभा में गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को पास करवाया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में गुर्जर आरक्षण विधेयक-2019 को चुनौती दी गई है। कैप्टन गुरविन्दर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरक्षण विधेयक-2019 को रद्द करने की गुहार लगाई है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की गई है। कैप्टन गुरविन्दर की तरफ से ही दायर की इस याचिका में राजस्थान सरकार पर जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गाय है।
गुरविन्दर ने अपनी याचिका में 50% से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक बताया है। ऐसे में अब एक बार फिर गुर्जर आरक्षण को लेकर पास विधेयक पर सवाल उठने की संभावना नजर आ रही है। राजस्थान में अब तक गुर्जरों को एक फीसदी आरक्षण मिल रहा है। उस एक फीसदी आरक्षण के साथ ही राजस्थान में कुल आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तक पहुंच गई है ऐसे में इस पर गुरविन्दर ने याचिका लगाई है।