पानीपत (सुनील वर्मा):

हुडा कार्यालय से सेक्टर-29 पार्ट 2 के सर्वे की सीडी गायब

अधिकारियों की मिलीभगत दिखाता है सीडी गायब होना
सेक्टर-29पार्ट 2 के प्लाॅटों की करवाई गई वीडियोग्राफी की सीडी हुडा कार्यालय से गायब हो गई है। सीडी गायब होने पर अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज तक नहीं कराई। सीडी एक तरह से खाली प्लॉटों को रिज्यूम करने की कार्रवाई का आधार है और हुडा अधिकारियों की टीम ने मौके पर तैनात होकर वीडियोग्राफी करवाई थी। सीडी गायब होना मिलीभगत से जोड़कर देखा जा रहा है। मामले में स्टेट चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर ने इसे गंभीर मानते हुए लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दो महीने के अंदर जैसे भी प्रयास कर सीडी के डाटा जुटाकर दूसरी कॉपी तैयार करने को कहा है।
हुडा सेक्टर-29 पार्ट 2 में अधिकतर डाइंग यूनिट हैं। 700 के करीब डाइंग यूनिट यहां चल रही हैं। सेक्टर में प्लॉट अलॉटमेंट के बाद नियम के तहत पांच साल की समय अवधि में निर्माण कार्य पूरा करना होता है। सेक्टर के हालात ऐसे रहे कि प्लॉट अलॉट करवाने के बाद भी फैक्टरियों का निर्माण कई उद्यमियों ने नहीं किया। इस पर प्लॉट रिज्यूम करने की प्रक्रिया अमल में लानी शुरू की गई। इसके लिए हुडा अधिकारियों ने सर्वे भी किया। वर्ष 2013 में खाली प्लॉटों की वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके लिए सर्वे टीम गठित की गई थी। यही वीडियो प्लॉटों को रिज्यूम करने का आधार है। हुडा कार्यालय से यह सीडी ही गायब हो गई है।
शहर को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए शहर में गलियों, मोहल्ले में लगे डाई हाउस (रंगाई उद्योग) को शिफ्ट करने के लिए 2003 में सेक्टर-29 पार्ट 2 औद्योगिक क्षेत्र को विकसित किया गया। उस समय सर्वे में शामिल 494 उद्यमियों को सेक्टर-29 पार्ट 2 में प्लाट तो दे दिए। बाद में भी प्लॉट अलॉट हुए। नियम के तहत पांच साल के अंदर प्लॉट पर फैक्टरी निर्माण करना था। कई उद्यमियों ने यह नहीं किया। हुडा ने 72 प्लॉट रिज्यूम किए। विडियोग्राफी भी करवाई गई। पानीपत डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने बताया कि 9 प्लाॅटों का मामला रोहतक से चंडीगढ़ चला गया था। चंडीगढ़ सचिवालय में हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने नवंबर 2015 में प्लाॅट रिलीज कर दिए थे। अब 63 प्लॉटों की फाइल बहाली के लिए लंबित है।
हुडा सेक्टर में प्लॉटों के रिज्यूम करने की कार्रवाई जानने के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत हुडा अधिकारियों से सीडी की कॉपी मांगी गई थी। कार्यालय ने सूचना उपलब्ध नहीं करवाई तो मामला स्टेट चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर यशपाल सिंह के पास पहुंचा। हुडा एस्टेट ऑफिसर ने यहां पक्ष रखते हुए बताया कि वर्ष 2014 में हुडा कार्यालय सेक्टर-18 में बनी बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया था। उस दौरान जेई सतीश कुमार के पास सीडी अन्य रिकॉर्ड था। कार्यालय शिफ्टिंग के दौरान सीडी गुम हो गई। इन्फॉर्मेशन कमिश्नर ने इसे गंभीर बताते हुए लापरवाही बरतने वाले जेई सतीश पर विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। हुडा के किसी कार्यालय में उसका अतिरिक्त रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया। ऐसे में दो माह के अंदर संबंधित वीडियोग्राफर से संपर्क कर या अन्य माध्यम से सीडी का डाटा जुटाकर दूसरी तैयार करने को कहा है।
सेक्टर-29 पार्ट 2 के सर्वे की सीडी गायब होने की जानकारी उन्हें मिली है। कार्यालय शिफ्टिंग के दौरान सीडी गुम होना बताया गया है। मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। सीडी का रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। -दीपकघनघस, एस्टेट अधिकारी हुडा।
शिकायतकर्ता जुगविंद्र मलिक का कहना है कि हुडा कार्यालय से रिकॉर्ड का गायब होना अधिकारियों की मिलीभगत जाहिर कर रहा है। सर्वे की सीडी प्लॉटों के रिज्यूम करने और बहाल करने का अहम आधार है। प्लॉट पर निर्माण सर्वे के बाद हुआ या पहले, इसकी जानकारी सीडी से ही मिलती है। ऐसे में भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले में दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कायदे से सर्वे की सीडी गायब होने पर एफआईआर करवाई जानी चाहिए थी।

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