बोकारो में नोटबंदी के बाद से 700 करोड़ का हुआ कैशलेस लेनदेन मो०इम्तियाज़ आलम रिपोर्टर बोकारो बोकारो : आठ नवंबर को नोटबंदी (विमुद्रीकरण)को एक साल पूरा हो गया है। नोटबंदी सबसे बड़ा फायदा डिजिटल लेनदेन को काफी बढ़ावा मिला है। पिछले कुछ माह में करीब 700 सौ करोड़ का लेनदेन नकदी रहित हो चुका है। अकेले स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की बात करें तो चार सौ करोड़ के ऊपर का लेन-देन डिजिटल हो चुका है। पीएनबी, बैंक आफ इंडिया और स्टेट बैंक आफ इंडिया के करीब सात लाख उपभोक्ता रोजाना कैशलेस का उपयोग कर रहे हैं।कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए एसबीआइ अपने उपभोक्ताओं के लिए और भी कई ऑनलाइन साफ्टवेयर लेकर आ रहा है। जिसमें भीम आधार एप है, इसके तहत छोटे व्यवसायियों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में काफी सहूलियत मिलेगी क्योंकि इसमें व्यवसायियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। जिले में एसबीआइ अबतक एक हजार से ज्यादा जगहों पर इस एप को इंस्टाल कर चुकी है। एसबीआइ की 40 ब्रांचों में बने ग्रीन चैनल के माध्यम से रोजाना 50 फीसद से अधिक का ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हो रहा है। कुछ ब्रांचों मे 90 फीसद तक काम आनलाइन हो रहा है। नोट बंदी में अब तक स्टेट बैंक आफ इंडिया, पीएनबी और बैंक आफ इंडिया के करंसी चेस्ट में करीब 1800 करोड़ 1000 और 500 के नोट जमा हुआ है। 2200 पॉस मशीनों का वितरण एसबीआइ, पीएनबी और बैंक आफ इंडिया नेअपनेउपभोक्ताओं को करीब 2200 पॉस मशीन का वितरण कर चुके हैं। 500 मशीने और देने के लिए आर्डर दिया गया है। एसबीआइ ने जहां भी अपने पॉस मशीन को इंस्टाल किया है उपभोक्ता वहां से जरूरत पड़ने पर 2000 कैश भी निकाल सकता है। इसके लिए एसबीआइ व्यवसायी के खाते में 500 अतिरिक्त पैसे का भुगतान करती है। अगर किसी व्यवसायी की पॉस मशीन से कोई उपभोक्ता एक हजार रुपये निकालता है तो उसके खाते में 1500 रुपये जमा बैंक द्वारा होता है।कोट-बैंक कैशलैस को पूरी तरह से बढ़ावा दे रहे हैं। पहले से कुछ परेशानी कम हुई है, लेकिन कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता काफी जरूरी है। सरकार को इसके लिए विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करना होगा लेकिनजानकारी के अभाव में रोजाना कोई न कोई उपभोक्ता ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसके रोकने के लिए ग्राहकों को जागरूक होना पड़ेगा।

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