सूरज कुमार (उन्नाव ब्यूरो),बिहार के सिंघिया से ब्रजेश कुमार की  की खास रिपोर्ट।
*फ़िल्म पद्मावती विवाद से भरी या प्रचार करने का बहाना।*
पद्मावती फ़िल्म को लेकर जिस तरह से विवाद बढ़ता जा रहा है।ऐसा लगता है कि कुछ लोग ऐसे है जिनकी दिलचस्पी इस विवाद को तूल देने में है। यह फ़िल्म तभी विवाद में आई थी जब राजस्थान में पद्मावती की शूटिंग के समय निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ हाथापाई हुई थी। इस घटना को लेकर निर्देशक संजय लीला भंसाली ने नाराज लोगो को यह आश्वासन दिया था कि फ़िल्म में कुछ भी प्रचलित मान्यताओं के विपरीत नही होगा,लेकिन जब फ़िल्म पद्मावती का ट्रेलर आया तो लोगों को यही लगा कि उन्हें दिए गए अस्वासन को पूरा नही किया गया।जिस तरह से यह समझना कठिन है कि पद्मावती के मान-सम्मान को लेकर चिंतित लोग फ़िल्म की विषयवस्तु जाने और उसे देखे बिना ही इस नतीजे पर पंहुच गए कि उनका चित्रण सही तरीके से नही किया गया है उसी तरह यह भी है कि फ़िल्म निर्देशक ने और फ़िल्म से संबंधित लोगों ने इस काल्पनिक अंदेशे को दूर करने में तत्परता का परिचय क्यों नही दिया? क्या इस लिए कि हंगामा होता रहे और फ़िल्म को मुफ्त का प्रचार मिलता रहे? ऐसे सवाल इस लिए उभर आए क्योंकि फ़िल्म निर्माता सेंसरबोर्ड की हां या न का इंतजार किये और यंहा तक कि उसे सही फ़िल्म की प्रति सौपे बगैर कुछ चुनिंदा लोगो को फ़िल्म दिखाना पसंद करते हैं, लेकिन इसमें वे लोग शामिल नही होते जो सबसे ज्यादा आपत्ति प्रकट करते है।आखिर सेंसर बोर्ड से पहले फ़िल्म को मीडिया के चुनिंदा लोगो को फ़िल्म दिखाने और उनके जरिये जनता को संदेश देने का क्या मतलब ह? फ़िल्म निर्माता के रवैये पर सेंसर बोर्ड की आपत्ति सर्वथा उचित व सही है।
भारत के कई राज्यों के लोग फ़िल्म पद्मावती को लेकर एक ऐसे समय गुस्से में है जब सुप्रीम कोर्ट यह कह रहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। नि:संदेह ऐसा ही होना चाहिए, लेकिन इसी के साथ कला और रचनात्मकता के नाम पर धार्मिक, सांस्कृतिक प्रसंगों , ऐतिहासिक मान्यताओं के निरादर की अनुमति भी नही दी जा सकतीl
बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंघिया  प्रखंड के लगमा से सिंघिया तक मोटरसाइकिल जुलुस निकालकर विरुद्ध किया गया ,जुलुस   में भाग लेने वालों में राजा सिंह ,मयंक कुमार सिंह ,गोपाल सिंह ,पंकज सिंह ,शमसेर सिंह ,रितेश कुमार सिंह समेत सैकरों  लोग थे |

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