झाबुआ पॉवर प्लांट नहीं मान रहा नियम कायदे!

साकेत जैन सिवनी

।आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ लिमिटेड के द्वारा संस्थापित कोल आधारित पॉवर प्लांट में कोयले की आपूर्ति में नियम कायदों को साफ तौर पर धता बतायी जा रही है।

संयंत्र में कोल परिवहन से संयंत्र के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के लिये मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। पॉवर प्लांट के लिये लाया जा रहा कोयला ग्रामीणों के जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है, जिसको लेकर ग्रामीण और किसान काफी परेशान हैं। पॉवर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिये नियमों को ताक में रखकर कोयला रेक पॉइंट से मशीनों और ट्रकों के माध्यम से पहुँचता है। ट्रकों में लोड कोयला बिना किसी सुरक्षा इंतजामों के साथ पॉवर प्लांट तक लाया जाता है और डम्प किया जाता है।

कोयला जब रेक पॉइंट से मशीनों से ट्रकों में कोयला लोड किया जाता है, तब कोयले की डस्ट उड़ती है और लोडिंग के बाद कोयले से भरे ट्रक सडकों पर दौड़ते हैं, तो उनसे निकलने वाली कोयले की डस्ट इलाकें के तालाब कुंए और अन्य पानी के स्त्रोतों को दूषित कर रही है।

लोगों का आरोप है कि कोयले की डस्ट से खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है। इसके अलावा हवा में हर वक्त कोयले की डस्ट मौजूद रहती है, जिससे कारण स्थानीय लोग तरह-तरह की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। ट्रकों से निकलने वाले कोयले की डस्ट का असर पॉवर प्लांट के आस-पास के गाँव जैसे बरेला, बिनेकी, गोरखपुर प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की शिकायत वे कई बार झाबुआ पॉवर प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या को दूर करने के लिये कोई कदम नहीं उठाये गये हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की डस्ट की समस्या दिन प्रतिदिन गम्भीर होते जा रही है।

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