कृष्ण कुमार संजय, चीफ एडिटर : बिहार राज्य के सरकारी विद्यालयों में नियोजित करीब पौने चार लाख 
पुराने शिक्षकों के समान वेतन देने पर राज्य सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। पटना हाईकोर्ट की ओर से समान वेतन देने के फैसले पर शीर्षस्तर पर विचार विमर्श के बाद जो तस्वीर उभरी है, उसमें आदेश का पालन संभव नहीं है। सरकार का मत है कि वित्तीय कोष व संसाधन के मद्देनजर समान वेतन लागू करना अभी संभव नहीं है, इसलिए सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने को लेकर शिक्षा विभाग के दो अधिकारी पिछले दो दिनों से दिल्ली में कैंप कर वरीय अधिवक्ताओं के साथ अपील की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार के बाद कभी भी यह अपील दायर की जा सकती है। सरकार फैसले को लागू करने की स्थिति में नहीं ।समान वेतन को लेकर पूछे जाने पर बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह  को पि न्यूज और एनटीवी टाइम्स स्टेट ब्यूरो चीफ पंकज कुमार से बातचीत में कहे कि वर्ष 2009 से समान वेतन देने की बात कही गयी है। एरियर की राशि ही कम से कम 75000 करोड़ हो जाएगी। यह राशि आएगी कहां से? इसलिए यह संभव ही नहीं है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि 75000 करोड़ रुपए देने का मतलब है कि राज्य सरकार के सभी विभागों की सभी योजनाएं बंद कर दी जाएं। तभी इतनी राशि समान काम के समान वेतन मद में दी जा सकती है। पर, सभी जन कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी जाएं, यह भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फैसले को लागू करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए जहां जरूरी होगा, अपील करेंगे। आगे अब सुप्रीम कोर्ट का इंतजार किया जाय।

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