बिहार ब्यूरो :- कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार का तीसरा कृषि रोडमैप समावेशी विकास का बेहतरीन मॉडल साबित होगा। इसके लागू होने के पांच साल के भीतर हर भारतीय की थाली में एक बिहारी व्यंजन होगा। इसका फोकस राज्य के किसानों की आमदनी दोगुनी करने पर है।मंगलवार को कृषि मंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार सिंह और प्रधान सचिव सुधीर कुमार के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर तीसरे कृषि रोडमैप के शुभारंभ समारोह की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द 9 नवम्बर को बापू सभागार में तीसरे कृषि रोडमैप का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समारोह की अध्यक्षता करेंगे। उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी समेत 12 विभागों के मंत्री मंचस्थ रहेंगे। तीसरा कृषि रोडमैप 12 विभागों के सहयोग से बना है और यह 1 लाख 54 हजार करोड़ का है।डॉ. कुमार ने कहा कि तीसरे रोडमैप का लक्ष्य जैविक खेती, खाद्य तथा पोषण सुरक्षा, समावेशी विकास के लिए सदाबहार तकनीक पर जोर देना है, ताकि भविष्य की भी जरूरतों को पूरा किया जा सके। हर जिले में चिह्नित बागवानी फसलों के विकास के कार्यक्रम चलेंगे। बगीचा बचाओ अभियान के तहत पांच वर्ष उम्र के आम तथा लीची पौधे तथा इससे अधिक आयु के बगीचे की जुताई-पुताई होगी। जैविक खेती के लिए गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों एवं एसएच-एनएच के दोनों तरफ गांवों का चयन कर जैविक कॉरिडोर बनेगा। जैविक सब्जी उत्पादन को कृषि इनपुट सब्सिडी कार्यक्रम के तहत प्रोत्साहन मिलेगा। गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रचार-प्रसार होगा।कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि के समग्र विकास को 2008 से कृषि रोडमैप बन रहे हैं। पहले रोडमैप की अवधि 2007-08 से 2011-12 थी। दूसरे में 2012 से 2017 के कार्यक्रम बनाए गए थे। तीसरे की अवधि 2017 से 2022 होगी। प्रेस कांफ्रेंस में कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय और उद्यान निदेशक अरविन्दर सिंह भी मौजूद रहे।

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