पी न्यूज़ डेक्स राजेश कुमार मुन्ना -
जैविक खेती करने वालों को तीन वर्ष तक सरकार मदद करेगी। इसके लिए कृषि विभाग एक मॉडल किट बनाएगा जिसे किसानों को दिया जाएगा। किट में रकबे के अनुसार वर्मी कंपोस्ट, बायो फर्टिलाइजर, बायो पेस्टीसाइड और उन्नत प्रभेद के बीज होंगे। तीन साल बाद प्रमाणीकरण हो जाने पर किसानों को खुद ही इसकी व्यवस्था करनी होगी।राज्य सरकार ने 2010 में ही जैविक प्रोत्साहन योजना बनाई थी। इसके तहत भी किसानों को उपादान देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने के लिए भी सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित किया। इसके लिए पहले 50 और अब 40 प्रतिशत अनुदान देने की व्यवस्था है।इस बार सरकार ने पूरी व्यवस्था बदल दी है। अब जैविक खेती के लिए जैविक कॉरिडोर बनाया गया है। इसके लिए गंगा किनारे के जिलों के अलावा कुछ एनएच किनारे के जिलों का चयन किया गया है। पहले चरण में पटना से भागलपुर तक गंगा किनारे के जिले और एनएच किनारे के दनियावां से बिहारशरीफ तक के इलाके में जैविक खेती करने का फैसला किया गया है। इन इलाकों में उन गांवों का चयन किया जाएगा जो जैविक खेती के लिए उपयुक्त होंगे। मुख्यत: सब्जी उत्पादकों के लिए यह व्यवस्था होगी।जैविक कॉरिडोर में चार योजनाओं के तहत सरकार काम करेगी। सभी इलाके के लिए अलग-अलग योजनाएं चयनित की गई हैं। पटना और नालंदा जिले में दियारा विकास योजना के तहत काम होगा। दनियांवा से बिहारशरीफ तक परम्परागत कृषि विकास योजना और नालंदा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और लखीसराय जिलों में जैविक खेती का काम जैविक प्रोत्साहन योजना के तहत किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने पांच साल का लक्ष्य भी तय किया है। पांचवें साल तक 50 हजार एकड़ में जैविक खेती करने का लक्ष्य है।
जैविक खेती का लक्ष्य:- 
02 हजार एकड़ में होगी 2017-18 में
25 हजार एकड़ में हो

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