दिल्ली से राजेश तिवारी  की रिपोर्ट :- जहां एक तरफ दिल्ली सरकार, एम.सी.डी तथा केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा शौचालयो निर्माण के विषय मे वाहवाही लूटने के लिये तमाम दावे कर रहीं है वहीं यह रही हमारे पीन्यूज संवाददाता द्वारा किया गया इन शौचालयो का रिलेयटी टेस्ट शौचालयो के नाम पर देश भर मे बहुत बडा घोटाला चल रहा है तमाम दावो के बावजूद भी देश की राजधानी दिल्ली मे भी बहुत से ऐसे इलाके है जहां लोग खुले मे शौच हेतु मजबुर हैं। 
स्तिथी यह है की जहां शौचालय या जन प्रसाधन पहले से ही मौजूद है या सही कंडीशन मे है विभाग द्वारा या तो उसी को तोडकर रिपेयर के नाम पर अनावश्यक पैसा खर्च किया जा रहा है या फिर उसी के साथ दूसरा शौचालय या यूरिनल बना दिया जाता है। यधपि नियमानुसार हर सौ मीटर पर एक जन प्रसाधन केंद्र होना चाहिये जोकि ऐसा नही हो रहा। इस प्रकार से अविवेकपूर्ण कार्य अदूरर्शिता तथा अनियमित्ता से एक तरफ करदाताओं का पैसा अपव्यय हो रहा है तथा वहीं दूसरी तरफ जरूरतमंदो को लाभ भी नही मिल रहा।

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