अभिषेक के साथ राजाबाबू की रिपोर्ट :हाजीपुर के कोनहारा घाट जिसे पुराणों में मोक्ष भूमि माना जाता है. पुराण में वर्णन है कि यही वह स्थान है जहां गज यानी हाथी रूपी अपने भक्त के पुकार पर भगवान विष्णु ने आकर घड़ियाल का वध कर भक्त को मुक्ति दिलाई थी. श्रापित घड़ियाल भगवान के हाथों वध किए जाने से मोक्ष पाया था. तभी से इस जगह को मोक्ष भूमि माना जाता है.

माना जाता है कि इस स्थान पर हर तरह की मुक्ति हासिल हो जाती है. पूर्वी भारत में स्थापित अंधविश्वासों, भूत और बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के लिए ओझा और भूतों को मानने वाले और भूतों से परेशान लोग इस खास दिन का इंतजार करते हैं और यहां आकर अनुष्ठान कर भूतों को अपने ऊपर से भगाते हैं.

कार्तिक पूर्णिमा की रात होने वाले विशेष मेले में दूर-दराज के लाखों लोग पहुंचते हैं और
रातभर भूत बुलाने का अनुष्‍ठान चलता है, स्थानीय भाषा में इसे भूत खेली कहते है. कई किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस मेले में आपको दूर-दूर तक हर जगह एक से बढ़कर एक अनूठे भूत अनुष्ठान देखने को मिल जाएंगे.

इस मेले में लाखों लोग बुरी आत्माओं से छुटकारे के लिए पहुंचते हैं. भूत को पकड़ने और भगाने का दावा करने वाले ओझा भी इस मेले में बड़ी संख्या में आकर अपनी दुकान लगाते हैं. जगह-जगह सजी ओझाओं की दुकान पर भूत भगाने और उतारने के करतब देख आप बरबस अरेबियन नाइट्स और अलिफ लैला की दुनिया में महसूस करेंगे.

कहीं भूत भगाने के लिए महिलाओं को बालों से खींचा जाता है, तो कहीं डंडो से पिटाई की जाती है. भूतों के इस अजूबे मेले में आए ओझाओं के दावे भी आपको अजूबे लगेंगे.

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