सूरज कुमार (उन्नाव ब्यूरो ) की खास रिपोर्ट
शुद्ध वायु हेतु एक युद्ध।
 उनाऊ शहर  का नजारा तो एकदम बदल गया है। शहर के पार्को में जहां अक्सर बच्चे खेला करते थे, अब उन पार्कों में सन्नाटा सा पसर गया है। अखबार और टी0वी0 चैनल राजधानी दिल्ली का हाल अपनी शुर्खियों में बयां कर रही है। दिल्ली में निवास करने वाले लोगो को धुंध से बचने का कोई उपाय समझ नही आ रहा है। समस्त भारत वासियों को इस विषय मे ज्ञात है कि देश की राजधानी दिल्ली वायु प्रदूषण के जाल से किस प्रकार घिरी हुई है? इस प्रदूषण की कई वजहें है। जिन पर लगातार कई टी0 वी0 चैनलों पर लगातार प्रतिदिन बहस   हो रही है। यह सिर्फ दिल्ली का ही हाल नही है वरन उत्तर भारत के कई शहर भी  वायु प्रदूषण का शिकार है।
तो फिर बच्चें कहाँ खेलें? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। नुकसानदेह हवा के चलते बच्चों को खेलने से रोका गया।, तो क्या होगा आखिर कब तक सभी बच्चे मास्क लगाकर घूमेंगे? अधिकतर सभी लोगों के अंदर इसी सवाल का हल पता करने की जिज्ञासा होगी। कई लोगों से बात करने पर यह सामने आया कि कई लोगों के परिवार पर इस प्रदूषित हो गयी हवा का प्रभाव पड़ गया है। कई घरों के छोटे बच्चों को सांस लेने में तकलीफ आ रही है। जिसके कारण उन बच्चों का घर निकलना बंद है। यदि आप अखबार के पन्ने उलट कर देखें तो आपको धुंध  के विषय मे एक न एक खबर जरूर मिलेगी। और तभी आपको यह एहसास होगा कि मानव जीवन के साथ ही सभी प्रकार के जीव जंतुओं के जीवन और मृत्यु से जुड़े इस मुद्दे से निपटने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कितनी कमी है। इस प्रदूषण में सर्वाधिक प्रभावित राज्य दिल्ली , हरियाणा, पंजाब,उत्तर प्रदेश एक दूसरे पर दोसारोपण कर रहे है । लोगों का कहना  यह है कि इस भयावह मुद्दे पर केंद्र सरकार जो कि मोदी जी की है वह एकदम चुप्पी साधे हुए बैठी हुई है।

Post A Comment: