ब्यूरो रिपोर्ट अमित कुमार मिश्रा : जिला रीवा करहिया कृषि उपज मंडी किसानों का हाल बेहाल भावांतर के नाम पर किसानों के साथ ठगी 

और लूटपाट हो रही है शिवराज सरकार और व्यापारी मिलकर जेब कटी का धंधा अपनाएं विगत वर्ष उड़द ₹6000 क्विंटल से ₹8000 क्विंटल तक बिका था इस वर्ष भावांतर के नाम पर मात्र 2000 से 24 सौ रुपए अधिकतम क्विंटल तक उड़द बिक रहा है यही हाल सोयाबीन मूंग का भी है व्यापारी मंडी में आने के पहले ही योजना बनाकर आता है कि कितना डाक बोलना है सारे व्यापारी मिलकर यदि 2000 बोल दिए तो ₹2000 क्विंटल में किसान को देना ही पड़ेगा उसका कोई माई बाप नहीं है मंडी में किसान गांव से ट्रैक्टर में लादकर परिवहन चुकता कर के मंडी पहुंचता है मंडी पहुंचने में ही ₹5000 खर्च हो जाते हैं यदि वापस होता है तो  5000 चाहिए इसी परेशानी के कारण किसान अपना फसल उड़द सोयाबीन मसूर 2200 से 24 सौ रुपए के दाम में व्यापारी को देख कर चला जाता है मुख्यमंत्री खूब गाल बजा जाकर कहते हैं कि किसान को तुरंत पैसा मिलेगा आज मैंने स्वयं देखा किसानों से कहा जा रहा था कि 1 हफ्ते बाद आना कुछ किसानों को जिन्होंने पहले दिन अनाज बेचा था उनका 1% कटके पैसा मिल रहा। किसान खून के आंसू रोते धरने पर बैठे रहे। मंडी सचिव से बात करने पर सचिव ने कहा कि पूरे प्रदेश में अनाज की मांग कम है । इसलिए अनाज सस्ता जा रहा है। मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या लोगों ने भोजन करना बंद कर दिया। भावांतर के भंवर में किसान गले तक डूब गया है। किसान चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे यह सरकार हमें मौत के मुंह में धकेल रही है भावांतर वापस लो। हम समर्थन मूल्य से प्रसन्न हैं। किसानों के साथ धरने पर बैठ कर संकल्प किया कि प्रतिदिन मंडी आकर किसानों के दुख दर्द को दूर करने का प्रशासन तक किसानों की बात पहुंचाने का भरसक प्रयत्न करूंगी आज उड़द मूंग और सोयाबीन के दाम मात्र 18 सौ रुपए कुंतल मिल रहे थे किसानों ने मंडी के गेट पर बैठ कर अपना आक्रोश व्यक्त किया किसानों की एकमात्र माग समर्थन मूल्य पर ही सरकार हमारा अनाज ले कविता पांडे रीवा मध्य प्रदेश

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