असुरक्षित यौन सम्बन्ध एच.आई.वी. संक्रमण की जानकारी/उत्तर प्रदेश में लगभग  1.50 लाख   एड्स रोगी चिन्हित किये गये
शुभम शंकर मिश्रा की रिपोर्ट :
बहराइच। जनपद न्यायाधीश श्री मोहम्मद असलम के निर्देश पर विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बहराइच के तत्वावधान में एड्स जागरूकता समिति के सहयोग से मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में एच.आई.वी./एड्स जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बसन्त कुमार जाटव ने कहा कि आम लोगों की भांति एच.आई.वी./एड्स रोगी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अन्तर्गत प्रदान की जा रही सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एड्स पीड़ित व्यक्ति को भी एक आम आदमी की भांति सभी अधिकार प्राप्त हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दरवाजे़ सभी लोगों के लिए समान रूप से खुले हुए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि एड्स रोग को चरित्रहनन से जोड़ कर न देखा जाय। क्योंकि असुरक्षित यौन सम्बन्ध के अतिरिक्त अन्य कई असावधानियों के कारण भी लोग एच.आई.वी. से संक्रमित हो सकते हैं। 

एच.आई.वी./एड्स पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उन्होंने सभी लोगों को सुझाव दिया कि नियमित रूप से खून की जाॅच करायें और संक्रमण के लक्षण दिखते ही उचित परामर्श लेकर इलाज करायें। श्री जाटव ने कहा कि एड्स आज विश्वव्यापी समस्या बन चकी है। सार्थक इलाज के अभाव में जागरूकता और सावधानी जैसे अस्त्र-शस्त्र से ही इस जान लेवा बीमारी का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एड्स आज भी असाध्य (उपचार है किन्तु निदान नहीं) है, पूर्ण एवं सही जानकारी ही इसका एक मात्र बचाव का उपाय है।

जागरूकता गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. योगिता जैन, ए.आर.टी. सेन्टर के चिकित्सक डा. अंशुमान सिंह, शरणम संस्थान के डी.आर.पी. राजेश पाठक, हस्तक्षेप संस्था के आशीष व अन्य चिकित्सकों एवं विषेशज्ञों ने बीमारी, लक्षण, उपचार एवं बचाव तथा विश्व एड्स दिवस आयोजन के उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि विश्व एड्स दिवस का उद्देश्य यही है कि एच.आई.वी./एड्स के प्रति लोगों जागरूक किया जाय तथा इस बीमारी के कारण अपनी जान गवाने वाले लोगों को याद किया जाय।

वक्ताओं की ओर से जानकारी दी गयी कि वर्ष 1981 में अमेरिका के राज्य कैलिर्फोनिया में पहला रोगी सामने आया था। जबकि भारत के चेन्नई में वर्ष 1986 तथा उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में वर्ष 1987 में पहला मामला दर्ज किया गया था। वर्तमान में पूरे संसार में लगभग 333 लाख, भारत में 21 लाख तथा उत्तर प्रदेश में लगभग 1.50 लाख रोगी चिन्हित किये गये हैं। भारत में एच.आई.वी./एड्स के खतरे से लोगों को आगाह करने के लिए 1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम का प्रारम्भ किया गया है तथा 1999 में उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी का गठन किया गया है। 

कार्यक्रम के दौरान बताया कि असुरक्षित यौन सम्बन्ध के कारण लगभग 88.2, समलैंगिकता के कारण 1.5, संक्रमित रक्त के प्रयोग से 01, संक्रमित सुईयों के प्रयोग से 1.7 तथा गर्भवती माॅ से बच्चों को लगभग 05 प्रतिशत लोग एच.आई.वी. के संक्रमण में आते हैं। जनपद में प्रभावी अंकुश के लिए 05 आईसीटीसी केन्द्रों पर निःशुल्क जाॅच एवं परामर्श की सुविधा तथा समस्त सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क जाॅच की सुविधा उपलब्ध है। जहाॅ प्रशिक्षित एल.टी. द्वारा जाॅच की जाती है।

संगोष्ठी के माध्यम से लोगों को जानकारी दी गयी अपने जीवन साथी के साथ वफादार रहें, असुरक्षित यौन सम्बन्ध में बचने के लिए कण्डोम का उपयोग करें, नियमित रूप से रक्त की जाॅच करायें, प्रमाणित रक्त ही शरीर में चढ़वाये, उपयोग की गई सुईयों व निड्ल्स का उपयोग कदापि न करें। लोगों को यह भी बताया गया कि एच.आई.वी. संक्रमण एक साथ रहने, हाथ मिलाने, स्वीमिंग पूल व कपड़ों का साझा करने, एक साथ खाने अथवा मच्छर इत्यादि के काटने से नहीं फैलता है | विषय विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गयी एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति को टी.बी. होने आसार दूसरे आम लोगों की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक होते हैं। इसलिए टीबी रोग से मिलते जुलते लक्षण दिखने पर रक्त की जाॅच अवश्य करायें। रक्त की जांच के विषय में बताया गया कि यह जाॅच व्यक्ति की स्वेच्छा से होती है और इसके परिणामों को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा भी नहीं किया जाता है। संगोष्ठी में मौजूद सभी लोग इस बात सहमत दिखे कि हाईरिस्क एरिया के साथ प्रत्येक स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने की आवश्यकता है ताकि एच.आई.वी./एड्स के संक्रमण से लोगों को बचाया जा सके। 

इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पी.के. बांदिल, डा. अनिल कुमार व डा. योगिता जैन, डी.टी.ओ. डा. पवन कुमार, डीएचईआईओ सुनील सिंह सहित अन्य स्वैच्छिक संगठनो के पदाधिकारी व सदस्य, स्वास्थ्य कर्मी व अन्य सम्बन्धित लोग मौजूद रहे।

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