प्रो चित्तरंजन मिश्र तथा प्रो सुरेन्द्र दुबे साहित्य अकादमी की आमसभा के सदस्य चुने गए

विनय कुमार मिश्र, गोरखपुर
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो चितरंजन मिश्र को साहित्य अकादमी साहित्य अकादमी को साहित्य अकादमी की आम सभा का सदस्य चुना गया है । 
इसके अतिरिक्त इसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष तथा बुन्देलखण्ड विवि, झांसी के कुलपति प्रो सुरेन्द्र दुबे को भी इस महत्वपूर्ण आम सभा का सदस्य चुना गया है।उनका कार्यकाल 5 वर्ष का होगा।कुलपति प्रो विजयकृष्ण सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की है कि इससे विवि की प्रतिष्ठा में श्रीवृद्धि होगी तथा इनके अनुभव से अकादमी भी समृद्ध होगी।विश्वविद्यालय और विशेषकर यहां के हिंदी विभाग के लिए यह गौरव का विषय है कि इस समय देश और प्रदेश मैं साहित्य की सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रमुख इसी विभाग से हैं।प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष हैं तथा प्रो सदानंद प्रसाद गुप्त उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष है। इस से पूर्व प्रख्यात आलोचक कवि एवं इसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे प्रो परमानंद श्रीवास्तव भी साहित्य अकादमी के आम सभा के सदस्य रह चुके हैं।
साहित्य अकादमी की आम सभा पंचानवे सदस्यों की होती है है जिसमें सभी राज्यों की सरकारों द्वारा नामित व्यक्ति भी सदस्य होते हैं। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ सरकार की तरफ तरफ से इसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष तथा संप्रति बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति प्रो सुरेंद्र दुबे नामित किए गए हैं ।
इसके अतिरिक्त देश के सभी विश्वविद्यालयों से नामित व्यक्तियों की सूची में से 20 विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भी चुने जाते हैं । इसी श्रेणी में प्रो चितरंजन मिश्र का चयन का चयन हुआ है।इसके अतिरिक्त राज्यों की विभिन्न अकादमियों तथा विभिन्न भाषाओं की अकादमियों के प्रतिनिधि भी आम सभा के सदस्य होते हैं और भारत के राष्ट्रपति भी 8 विद्वानों को इसकी सदस्यता के लिए नामित करते हैं।साहित्य अकादमी की आम सभा सभा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि साहित्य अकादमी पुरस्कार हेतु चयन यही करती है।अगली आमसभा और भी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यही अकादमी के अगले अध्यक्ष का भी चुनाव करेगी चुनाव करेगी ज्ञातव्य है कि प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का कार्यकाल आगामी फरवरी माह में समाप्त हो रहा है।

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