अधूरा विकास अधूरे वायदों के बीच झूलता जनपद उन्नाव

दुर्गेश प्रताप सिंह की रिपोर्ट :
उन्नाव। दो महानगरों के बीच बसे शहर का विकास आज भी अधूरा है। इसके जनप्रतिधियों के आधे अधूरे प्रयासाें के चलते किसी प्रकार का बदलाव आज तक नहीं दिख सका है। जल निकासी से लेकर कचड़े के निस्तारण की समुचित व्यवस्था को मुह ताकती प्रशासनिक व्यवस्था के पेंचों में छेद ज्यादा दिखाई देते हैं। साथ ही इन कमियों को दूर करने की कोशिश आज तक नहीं मुनासिब समझी गई है। वहीं अपनी गति से पैर पसारते जा रहे नगर की आबादी करीब चार लाख से ऊपर हो जाने के बाद भी नवीन इलाकों में कागजों पर तो विकास की पैंगे चलाई गई। लेकिन जमीनी स्तर पर ढाक के तीन पात वाली स्थिति ही ज्यादा नजर आती दिख रही है। नवीन नगर पालिका अध्यक्षा से शहर की जनता की काफी अ
पेक्षाएं भी इन दिनों हिचकोले लेती दिख रही है। वही वे भी अपनी जिम्मेवारी को अच्छी तरह से समझ चुकीं हैं। हो भी क्यो न भावी लोकसभा की जमीन भी वे अपनी जीत के साथ तैयार करने में चूंकना नहीं पसंद करेगा

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