ठंढ के इस मौसम में ज़मीन पर बैठ कर रहे बच्चे पढाई

 विनय कुमार मिश्र

गोरखपुर।इस मौसम में अधिकतर लोग जहाँ रजाई और कम्बल की गर्माहट और गर्म चाय की चुस्कियों से खुद को कड़ाके की ठंढ से बचा रहे है वही जिले भर के प्राथमिक विद्यालयों में देश का भविष्य ज़मीन पर बैठ कर पढाई करने को बाध्य है।नौनिहालों की यह तस्वीर जिले भर के प्राथमिक पाठशालाओं की है।जहाँ ज़मीन पर बैठे बच्चे इस कड़ाके की ठंढ में ठिठुर रहे हैं। जबकि ग्रामीण अंचलों में ठंढ के कारण स्थिति ज़्यादा ख़राब है।हालाँकि आस पास के जनपदों में शीतलहर के इस प्रकोप को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों को बंद करने का आदेश दे दिया है लेकिन शायद गोरखपुर में प्रशासन को अभी इन नौनिहालों के साथ किसी अनहोनी का इंतेज़ार है तभी तो समाचार लिखे जाने तक छुट्टी की कोई सूचना जारी नही की गई थी।मालुम हो की इन सरकारी पाठशालाओं में पढ़ने वाले अधिकत्तर बच्चे गरीबों, मजदूरों के होते है जिनके पास पर्याप्त पहनने,ओढ़ने के गर्म कपड़े नही होते है।
नकली फसल की दवा से ठगे जा रहे है किसान   
गोरखपुर।फसलों में छिड़काव करने वाली कीटनाशक,खर पतवार नाशक आदी दवा जिले भर में नकली,मानक के विपरित धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। मालूम हो कि किसान इतने पढ़े लिखे और जागरुक नहीं होते हैं कि वह सही गलत पहचान पाए।इसका दुकानदार फायदा उठाते हैं और इन्हें भरोसे में लेकर असली की जगह नकली दवा थमा देते हैं जिसमें कई गुना लाभ दुकानदार कमाता है लेकिन किसान बेचारा ठगा जाता है और उसकी फसल को कोई फायदा भी नहीं होता है। मालूम हो कि चौरी चौरा क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले नकली दवा पकड़ी गई थी जिसमें कुछ लोगों को जेल भी हुई थी।इधर फिर से क्षेत्र में नकली दवाओं का प्रचलन बढ़ गया है क्योंकि इस समय गेहूं के खेतों में कई प्रकार के खरपतवार खत्म करने के लिए दवाओं का किसान छिड़काव करते हैं जिसका फायदा यह दुकानदार उठा कर उन्हें नकली खरपतवार वाली दवा थमा दे रहे हैं।ये नकली फसल की दवा इसलिए धड़ल्ले से और बेची जा रही है क्योकि कोई इनकी जाँच पड़ताल करने वाला नही है।कुछ एक जगहों पर शिकायत मिलने पर दुकानों की जाँच तो हुई लेकिन बाकी जगहों को राम भरोसे छोड़ दिया गया है।दुकानों पर फसल की दवा ब्रांड़ वाली कम मिलती है लेकिन नये नये ब्रांड़ खूब मिलते है जो कि मानक के विपरीत होते है।

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