गुरदासपुर से  राजेश अलूना धारीवाल  की रिपोर्ट :
 खास मुलाकात प्रभु जीशु मसीह के आराधक के  साथ

वैसे तो ज्यादा तर लोग अपनी पहचान तथा पैसे के लिए सब कुछ छोड़ देते है पर कुछ लोग ऐसे होते जो परमेश्वर के लिए इन सब चीज़ो को नज़रअंदाज़ करते है क्योकि उनको यह  पता है की जिस के लिए उन्होंने ने पहचान इज्जत शौहरत और पैसे को नज़रअंदाज़ किया है वो परमेश्वर  उनको बहुत बढ़ाएगा। आराधक शमी  हंस जी जो की सिर्फ प्रभु जीशु मसीह के लिए ही गाते है उनके साथ एक खास मुलाकात हुई। गुरदासपुर के एक छोटे से गाँव फैज़ुलाह चक जो की धारीवाल के पास है उनका ग्रेह्स्थान है।उनका जन्म 21 मार्च 1980 में हुआ। उनका बचपन इसी गांव में ही बिता और अपनी  प्राथमिक विधिया भी उन्होंने अपने  ही गाँव में की।शमी जी ने बताया की बचपन से ही उनको गाने का शौंक था। और उनका एक सपना था की लोग उनकी गायकी को पहचाने। धीरे धीरे वो अपनी मंज़िल के लिए चल पड़े। 1997 में शमी जी ने सूफी गायकी के बादशाह हँस राज़ हँस जी को अपना गुरु धार लिया।वही पर शमी जी का नाम शमी हँस उनके गुरु हँस राज हँस जी के द्वारा रखा गया। शमी जी ने बताया की उनको काफी कुछ सिखने  को मिला हंस राज जी से। शमी जी ने बताया की उनके मन को संतुष्टि नहीं थी। उनको लगता था की वो कही न कही परमेश्वर की संगति से दूर जा रहे है। उन्होंने फैसला लिया की वो सिर्फ और सिर्फ परमेश्वर खुदावंद  जीशु मसीह के लिए  ही गाएँगे।7 जुलाई 2011 को शमी जी ने अपना जीवन खुदावंद जीशु मसीह को दे दिया और सिर्फ 
जीशु मसीह के लिए ही गाने लगे। उन्होंने बताया की उसके बाद उनका जीवन बहुत बदल गया और वो काफी प्रसिद्ध भी हुए। देश विदेशो में शमी हँस जी ने परमेश्वर की आराधना की और बहुत बरकते भी प्राप्त की। आज के दौर में उनको सभी परमेश्वर के एक बहुमुल्ये  आराधक के रूप में जानते है। उन्हों ने बताया की इसके पीछे सबसे पहले वो प्रभु जीशु का धन्यवाद करते है। और अपने परिवार का भी जिन्होंने उनको हर मुश्किल समह में भी समजा। शमी हँस जी अपनी बेटी सीरत और बेटे माइकल को अपने लिए बहुत खुशनसीब समझते है। 

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