सूरज कुमार (उन्नाव ब्युरो) की खास रिपोर्ट
जितनी ज्यादा जागरूकता उतने बढे एचआईवी पीड़ित।
उन्नाव: जागरूकता ही एचआईवी से बचाव का ध्येय सूत्र है । जागरूकता को ही ध्येय मानकर जितनी तेजी से जन जागरूकता अभियान चलाया गया। उतनी ही तेजी से एचआईवी पॉजिटिव के पीड़ित व्यक्ति भी बढे है। दस साल के आंकड़े को देखा जाए तो इस वर्ष सबसे अधिक 70 एचआईवी पॉजिटिव अब तक पाए जा चुके है। जबकि 2011 में 66 रोगियों का सर्वाधिक रिकार्ड था। जो इस वर्ष टूट गया। ये आंकड़े इस बात का सबक देने के लिए काफी है कि अब तक जागरूकता के क्षेत्र में किये गए जिसने भी मिशन है वह सब नाकाम हो गए। अब इस समस्या से निपटने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।
एड्स की रोगथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान चलाकर लोगो को एचआईवी फैलने के कारणों के विषय  मे  जानकारी देकर आगाह  करने का दावा करता है। विभाग का नारा है जानकारी ही एचआईवी से बचाव है।लेकिन जिस प्रकार से रोगियों का इजाफा हो रहा है उससे तो लोगों में जागरुकता का अभाव लग रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2008 में जिले में 24 लोग एचआईवी पॉजिटिव थे।वर्ष 2009 में 24 से बढ़ कर 41 हो गयी। वर्ष2010 में मरीजों की कमी हुई और 28 रोगियों की पुष्टि हुई। वर्ष2011 में फिर अचानक मरीजों की संख्या तेजी से बढ़कर 66 हो गयी। वर्ष2012 में 40 मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। वर्ष 2013 में 56 मरीजो को पॉजिटिव पाया गया था। वर्ष 2014 में 44 , वर्ष 2015 में 20 व वर्ष 2016 में 42 एचआईवी पॉजिटिव लोग मील थे। लेकिन वर्ष 2017 में अब तक 70 लोगो को एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि की गई है, जिसमे 5 दंपति व बच्चे भी शामिल है।

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