बढ़ती ठंढ से धीमी हुई ज़िन्दगी की रफ़्तार
  विनय कुमार मिश्र
गोरखपुर।शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ठंढ का प्रकोप पिछले दिनों से बढ़ गया है। जिले मे व आसपास के क्षेत्र में बढ़ती ठंड ने सुबह शाम की गलन को बढ़ा दिया है। सर्द हवाओं के चलते अचानक क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदलता चला जा रहा है और वही पछुआ हवा के चलते गलन के साथ कडाके की ठंड पड़ने लगी है।जिसके चलते लोग अपने घरों में से निकलना जरूरी नही समझ रहे है । एक तरह से कहा जाये तो ठंढ ने ज़िन्दगी की रफ़्तार को धीमा कर दिया है। 
दिसम्बर माह के मध्य तक हल्की ठंड पढने से लोग यह कयास लगा रहे थे की इस बार ठंढ बहुत ही कम पड़ेगी लेकिन इस बार ठंड अचानक बढ़ गई और सारे कयास धरे रह गए । बाजारों में गर्म और ऊनी कपडों की मांग बढने लगी है। बुजुर्गों की माने तो वर्षो बाद इस तरह का साफ मौसम दिसम्बर माह के शुरूआती दिनो में देखने को मिला है। मौसम साफ होने से ही लोगों को लगा कि इस बार ठंड कम पड़ेगी लेकिन अचानक शुक्रवार की शाम से ही कोहरा गिरने व पछूआ हवाओं के चलने से एकाएक तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। जिसके कारण कडाके की ठंड पढने लगी है।
बहरहाल कडकडाती ठंड ने आमजनो की परिशानीयों को बढा दिया है। वही शाम होते ही शीतलहर के कारण से चारो तरफ के इलाके धूंध की आगोश में समा जा रहे है। इधर तीन चार दिनों से कोहरे के कारण दिन में दोपहर तक धूंध छाया रहा तो वही दोपहर बाद धूप की हल्की झलक देखने को मिलती है। ऐसे में लोगों का घरों से निकलना अटपटा लगने लगा। बच्चो और बुजुर्गों के सामने बढती ठंड ने मुसीबत खडी कर दिया है। लोग अपने घरों में दुबक कर बैठने लगे है। वही बाजारों में गर्म कपडों की मांग भी तेजी के साथ बढने लगी है। पिपराईच कस्बे में गर्म कपडों के विक्रताओं के पास काफी भीडभाड देखने को मिल रही है।फ़िलहाल देर से ही सही लेकिन यहां सरकारी अलाव की तपिश से लोगों ने कुछ राहत महसूस की है लेकिन फिर भी अभी तक ठंढ से बचाव के सरकारी प्रयास अधूरे नज़र आ रहे हैं।समाचार लिखे जाने तक स्कूलों मे छुट्टियाँ नही घोषित किया गया है ।सब लोग डीएम साहब के आदेश का इंतजार कर रहे है ।कुछ स्कूल तो ठण्डी की छुट्टी कर रखे है लेकिन सरकारी और गैर सरकारी के स्कूल अब भी खुल रहे है जिससे बच्चो को ठिठुरते हुये स्कूल जाना पड़ रहा है

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