सरकारी सम्पत्ति की बर्बादी एवं प्रदूषण का जनक और भ्रष्टाचार का अड्डा बने डीडीए के पार्क:-
दिल्ली से राजेश तिवारी की रिपोर्ट :

 पश्चिमी दिल्लीः- जहाँ एक तरफ सम्पूर्ण सरकारी तंत्र, न्यायालय एवं दिल्ली वासी भयावह स्माँग और प्रदूषण से जूझ रहे हैं वहीं दिल्ली की एक तिहाई भूमि को ग्रीन कवर के रूप में विकसित करने वाली डीडीए हार्टीकल्चर  डिवीजन के पार्कों में एन जी टी एवं सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजी घटना आज सोमवार दिनांक 11/12/2017 सायं 4.30 बजे डीडीए पार्क ए ब्लाक विकास पुरी(पुलिस लाइन के पास) की है, प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान के तहत लाखों रुपए खर्च कर कुछ महीनों पहले इस पार्क में लगाए गए महिला-पुरुष शौचालय की जहाँ कभी सफाई नहीं की गई और सफाई का बजट अधिकारी डकारते रहे। दिल्ली मार्निंग वाल्कर्स एसोशियेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता राघवेंद्र शुक्ला ने बताया आज हार्टिकल्चर सुपरवाइजर की पार्क में उपस्थिति के बावजूद इन शौचालयो में आग लगा दी गई शौचालय धू-धू कर जलकर राख हो गए।
ज्ञात हो कि पूरी दिल्ली के डीडीए पार्कों कूड़ा एवं खरपतवार निस्तारण की व्यवस्था नहीं है, पार्कों में ही गड्ढा करके पत्तियां , खरपतवार एवं कूड़ा करकट डालकर खुला छोड़ दिया जाता है और उसमें शरारती तत्व आग लगा देते हैं, जिससे प्रदूषण से जूझ रही राजधानी का दम और घुटने लगता है।
सिक्किम जैसे छोटे राज्यों में छोटे से हिस्से को विकसित कर हार्टिकल्चर टूरिज्म पाइंट बनाए गए और पर्यटकों के यहाँ आने से सरकारी खजाने भर रहे पर डीडीए हार्टिकल्चर कर्मचारियों की अकर्मण्यता के कारण जहाँ पार्कों का हाल बेहाल है, फूल पौधे तो दूर की बात पार्कों में धूल उठ रही होती है, लाइटें बंद रहती हैं महिलाएं एवं बच्चे पार्कों में आने से डरते हैं, कर्मचारी हाजिरी लगाकर ड्रयुटी से नदारद रहते हैं, पार्क में शराब पीना, हर तरह के नशेड़ियो का अड्डा बना हुआ है। कोई कह ही नहीं सकता यह राजधानी दिल्ली के पार्क हैं।
अधिकारियों से कोई शिकायत नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह है। क्या कभी पार्कों की दशा सुधरेगी? क्या  कभी किसी शहर की जीवन रेखा हार्टिकल्चर पर्यावरण संरक्षण जैसे महान कार्य को गम्भीरता से लेगी? क्या अधिकारियों की कभी नींद खुलेगी? क्या न्यायालय स्वत: संज्ञान लेकर इन पर्यावरण के दुश्मनों पर कोई कार्रवाई करेंगे।
राजनेताओं एवं प्रसाशनिक अधिकारियो की नाक के नीचे इतनी अव्यवस्था इतना भ्रष्टाचार फैला है और उनकी आँखें फिर भी बंद हैं।

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