देश को आगे बढ़ना है तो जात-पात छोड़ो-- उत्पल

दिलीप पाण्डेय की रिपोर्ट शिवहर 

इंजीनियर उत्पल कुमार ने एक बयान जारी करके कहा की भारत एक विकसित है लेकिन इस विकास के रास्ते जात पात छुआ-छूत ,ऊंचा-नीचा का भेदभाव सबसे बड़ा बाधक बन रहा है। आज हमारा देश के विकास का पहिया लगाकर तीव्र गति से चल रहा, परंतु क्या समाज के प्रति या किसी समुदाय विशेष हमारी सोच तेजी से बदला पाई है ,
जवाब है नहीं -
आज हमारा देश मंगल ग्रह से आगे पहुंचने की बात कर रहा ,और हम जात-पात छुआ-छूत, ऊंचा -नीचा कि भेदभाव में जकड़े हुए है। आजादी के 70 साल बाद ही जात -पात और ऊंचा -नीचा की भेदभाव से अपने आप को मुक्त नहीं करा पाए (जाती पाती छोड़ दो ,भेद-भाव तुम छोड़ दो ,हिंदू -मुस्लिम- सिख -इसाई आपस में हम सब भाई भाई )आधी कहावत आज के परिदृश्य में झूठा साबित हो रहा हैं। अलग-अलग संप्रदाय के लोग आपस में भेदभाव तो करते ही हैं ,इसके अलावा आंतरिक भेदभाव से भी वंचित नहीं। जैसे अग्री जाती-पिछड़ी जाति, शिया- सुन्नी इत्यादि ।शहरों में इस समस्या में कमी आई दूसरी तरफ गांव में जात-पात, छुआ-छूत ,ऊंच-नीच भेद-भाव खुलकर दिखता है अलग-अलग जाति के लोग अलग-अलग झुंड की तरह रहते हैं। जातिगत भेदभाव से ऐसी स्थिति बन गई है कि कोई गांव जहां सिर्फ राजपूत- भूमिहार बहुलता हैं ,तो दूसरा गांव यादव समुदाय से भरा पड़ा है कोई गांव दलितों से भरे पड़े हैं ,तो कई गांवों मुसलमान से भरे पड़े है ।इतना है नही अलग अलग धर्मों के अंदर भी ऊंच-नीच  का भेदभाव है ,कि वह हिंदू है तो क्या हुआ मैं उसे ऊंची जाति का हुँ और वह नीची जाति का हिंदू है।अगर कोई दलित है तो वह हमारे कुएँ से पानी नहीं भरेगा। हमारे सामानों का उपयोंग नहीं करेगा। हम जिस मंदिर में पूजा करते है उस मंदिर मे कोई भी दलित प्रवेश नहीं करेगा। आज भी लोगों मे ऐसी धारणा बनी हुई है, ठीक इसी तरह मुस्लिम धर्म में शिया और सूनी है तो दूसरे धर्मों के भी कुछ इसी तरह के हालात है। समाज के हर वर्ग को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए कई दलित, हिन्दू और मुस्लिम राजनीतिक पार्टियाँ बनी लेकिन लोग आज लोग उन्हीं राजनीतिक पार्टियों के हाथों की कठपुतली बन कर रह गये हैं। धर्म से जुड़ी पार्टियाँ समाज से जात-पात मिटाने के जिस मकसद से बनी वह मकसद कहीं खो गया और सत्ता के लालच में जाती-पाती के खाई को कम करने के जगह बढ़ाने लगें हैं।
आज राजनीतिक पार्टियाँ देश को लेकर राजनीतिक नहीं करते वो जात-पात को लेकर राजनिती कर रहे हैं। महाराष्ट्र से लेकर उत्तरप्रदेश तक के कई राज्यों की राजनितिक पार्टियो का जनाधार  ही जात-पात पर टिका हुआ हैं। जात-पात का भेदभाव हमारे साथ इस देश को चलाने वाली सरकार भी करती है। सरकार मे मत्रीं भी उन्हें ही बनाया जाता है जिनका आपने जाति पर मजबूत पकड़ होती है, ताकि वोट बैंक बना रहे। आखिर हम इस जातिवाद से कब बाहर निकल पायेंगे । क्या बिना अपने मानसिक विकास के भारत का विकास संभव है। आखिर दूसरे के फायदे के लिए अपने आप को कब तक कुर्बान करते रहेंगे। 
आज युवाओं को इस जातिवाद के राजनीति से उपर उठकर ऐसे लोगों को खिलाफ अपने आवाज को बुलंद करना होगा, ताकि ये लोग भविष्य में ऐसी राजनीति करने से बचे।

Post A Comment: