भारतीय इंजिनीयर की माँ ने बेटे की सजा कम करने की गुहार लगायी पाक सरकार से

चीफ एडिटर कृष्ण कुमार संजय की रिपोर्ट :

अपनी महिला मित्र से मिलने के लिए अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान गए  एक भारतीय इंजीनियर की मां ने बेटे की सजा कम करने के लिए पाकिस्तान  सरकार से गुहार लगाई | उक्त महिला ने  पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन को इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने  मांग  की है कि उनके बेटे की सजा की अवधि  माफ कर दे|
 इंजीनियर की मां ने कहा है, "मोहतरम सदर- आपकी हुकूमत ने हामिद अंसारी के मुकाबले ज्यादा संगीन जुर्म करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी रहम किया है." उन्होंने चिट्ठी में आगे लिखा है, "अगर आप हामिद की कैद की बकाया मुद्दत माफ कर सकते हैं, तो मानवीय आह्वान सुनने से देश की साख बढ़ेगी. वहीं, इससे हिंदुस्तानी जेलों में कैद पाकिस्तानी अवाम के लिए राहत की उम्मीद और मजबूत होगी."

उन्होंने कहा कि दोषी ठहराए जाने के पहले की तीन वर्ष की हिरासत को अगर सजा में जोड़ दिया जाए, तो मानवीय आधार पर उसको रिहा किया जा सकता है और फोन पर उसके परिवार से उसकी बात कराई जा सकती है.

भारतीय नागरिक पर एक सैन्य अदालत पर मुकदमा चलाया गया, जिसने उसे तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई. सजा की मियाद 15 दिसंबर, 2015 को शुरू हुई और अगले साल 14 दिसंबर को खत्म होगी.

बताया गया की  पेशावर केंद्रीय कारागार में पिछले साल साथी कैदियों के हमले में अंसारी जख्मी हो गया था. अंसारी मुंबई का रहने वाला है. पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, भारत के एक प्रबंधन संस्थान में सहायक प्रोफेसर रहे अंसारी और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट की रहने वाली एक लड़की में फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी |

जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता आई ए रहमान के मुताबिक, "अपनी दोस्त को संकट में देखकर उसने उसके बचाव का फैसला किया. उसे पाकिस्तान का वीजा नहीं मिल सका, लेकिन वह अफगानिस्तान गया और वहां से बिना वैध दस्तावेजों के पाकिस्तान में प्रवेश किया. उसे 14 नवंबर, 2012 को कोहाट के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया."

उन्होंने कहा, "इस प्रकार वह पिछले पांच वर्ष से पाकिस्तानी अधिकारियों की हिरासत में है. उस पर अवैध तरीके से पाकिस्तान में घुसने का नहीं, बल्कि जासूसी के आरोप लगाये गए और उसे एक सैन्य अदालत ने तीन साल की जेल की सजा सुनाई."

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