पानीपत से सुनील वर्मा

धर्म: साल का पहला चंद्रग्रहण 31 जनवरी को लगने वाला है। माघी पूर्णिमा के दिन लगने जा रहे इस ग्रहण का प्रारंभ शाम 5.58 मिनट पर शुरू हो रहा है जो रात 8.41 तक चलेगा|  यह ग्रहण माघ की पूर्णिमा को पड़ेगा जो कुछ लोगों के लिए अत्यंत शुभ और कुछ लोगों के लिए अशुभ हो सकता है। साथ ही चंद्र ग्रहण के दिन ही 176 साल बाद पुष्य नक्षत्र का विशेष योग बन रहा है। 



इस साल पांच ग्रहण होंगे, जिसमें से 3 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण हैं| 31 जनवरी को लगने वाले चंद्रग्रहण खग्रास चन्द्रग्रहण होगा | चंद्र ग्रहण भारत में 1 घंटा 16 मिनट रहेगा| द्वारी ने कहा कि भारत में इस चंद्र ग्रहण के बाद अगला चंद्रग्रहण 27 जुलाई को नजर आएगा माना जा रहा है कि कर्क के राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण अशुभ होगा। वहीं प्राकृतिक आपदाओं के आने की भी आशंका है। वहीं मेष राशि के जातकों के लिए व्यथा, वृष के लिए श्री, मिथुन के लिए क्षति और कन्या राशिवालों को लाभ होगा। इसके अलावा तुला राशि के लोगों को सुख और कुंभ राशि के लोगों को सौभाग्य की प्राप्ति होगी। भारतीय ज्योतिषाचार्यों की राय है कि ऐसा ग्रहण भारत में 35 साल बाद देखने को मिलेगा। यह ब्लू मून या सुपर मून और ब्लड मून तीन रंगों में देखा जा सकेगा।



क्या है चंद ग्रहण, यहां जानिये 

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब वह चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोकती है और उसमें अपनी छाया बनाती है. इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. इसे ब्लड मून भी कहा जाता है| विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी के और पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर चक्कर काटते हुए जब तीनों एक सीधी रेखा में अवस्थिति होते हैं। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है और चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है तो उसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है ऐसा केवल पूर्णिमा को ही संभव होता है। इसलिये चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को ही होता है। 



ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए 

ग्रहण की समाप्ति के उपरांत स्नान दान आदि धर्मकार्य करना चाहिए। यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो पवित्र नदियों के स्मरण के साथ स्नान करने से भी विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श, भोजन और नदी स्नान वर्जित माना जाता है । इसी के साथ मंत्रों का जाप कई गुणा फलदायक माना जाता है । ऊं क्षीरपुत्राय विह्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्रः प्रचोदयात्।। चंद्रग्रहण के सूतक के दौरान इस मंत्र का जाप करना सबसे लाभकारी माना जाता है।



क्या करें, क्या न करें 

चन्द्र ग्रहण के दिन बुजूर्ग, रोगी एवं बच्चों को छोड़कर घर के बाकि सदस्य भोजन न करें। गर्भवती स्त्रियोँ को ग्रहण में घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है दरअसल माना जाता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा होता है इसलिये घर में रहकर मंत्रोंच्चारण करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। किसी भी प्रकार के शुभ कार्य ग्रहण के दिन न करें।  ग्रहण के बाद दान करें. दान में आटा, चावल, चीनी,  दाल आदि दें|  ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए दुर्गा चालीसा या श्रीमदभागवत गीता आदि का पाठ भी करें|  जो लोग साढ़े-साती से परेशान हो तो शनि मंत्र का जाप करें या फिर हनुमान चालीसा पढ़ें|

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