बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर शुक्रवार को बक्सर जिला में विकाश समीक्षा यात्रा के दौरान भारी पत्थरबाजी हुई। पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी समेत कई अधिकारी घायल हो गए।सुरक्षाकर्मियों द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को काफी मशक्कत के बाद कार्यक्रम सम्पन्न कराकर सुरक्षित निकाला गया। लेकिन बिहार के ज्यादा प्रसार वाले दैनिक समाचारपत्रों ने इस खबर को डाउनप्ले पर ही रखा।
दुनिया के किसी भी देश में सूबे के मुखिया पर जानलेवा हमला हो जाए और घटना के दूसरे दिन स्थानीय अखबारों में उस खबर को पेज वन पर या तो जगह न मिले। और मिल भी गया तो उसे इस तरह प्रस्तुत किया गया जिससे पाठकों को समझने के लिए ज्यादा माथापच्ची कर खबर को समझना पड़े।बिहार के बक्सर जिला अंतरगत नंदन गांव में सैंकड़ों की भीड़ ने नीतीश के काफिले पर ईंट पत्थरों की भारी बारिश कर दी।  पुलिस को आसमानी फायरिंग करनी पड़ी। काफिले की अनेक कारों के शीशे चकनाचूर हो गये। अनेक पुलिस अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, अफसरों, स्थानीय लोगों और यहां तक कि स्थानीय विधायक को चोटें आयीं। सूबे के मुखिया को को चोट ना लगे, इसके लिए अफसरों ने उनके इर्द-गिर्द घेरा बनाकर कार्यक्रम संपन्न कराया। प्रदेश के किसी मंत्री के साथ अगर ऐसा हो जाए तो ऐसी घटना को बड़ी खबर समझते हुए एक घटना में कई रिपोर्टर मिलकर काम करते हैं। और जब मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के किसी दूरवर्ती जिला में घटना हो जाए तो उक्त जिला के पुरे मॉडेम ऑफिस को उस खबर पर काम करना होता है। और मख्यमंत्री के मामले में स्टेट ऑफिस में भी पैकेज स्टोरी के तहत काम होता है। जो प्रदेश के ज्यादा प्रसार वाले अखबारों के लिए यह खबर काफी मह्तवपूर्ण होता है। पाठको के लिहाज से भी यह खबर बहुत अहम है। लेकिन बिहार के ज्यादातर अखबारों में इस बड़ी खबर को डाउनप्ले कर ही रखा गया। 

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