श्रावस्ती से हरीश कुमार यादव की रिपोर्ट :

विशिष्ठ 
बी.टी.सी.शिक्षक व एसो इकाई श्रावस्ती द्वारा  मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन 
तहसीलदार  विजय  कुमार के माध्यम से स्वेटर वितरण के विरोध को लेकर दिया गया। जो कही न कही कमीशनखोरी व भ्रष्टाचार को लेकर ऐसा निर्णय लिया गया है।
भ्रष्टाचार की बात करते है लेकिन कोइ ऐसा विभाग नही जो इससे अछूता है। इसमें शिक्षा विभाग  ऐसा हैं कि यहा तो कुछ शिक्षक,कलर्क से लेकर अधिकारी भी भ्रष्टाचार में शामिल है। यहा रिश्वत का खुला खेल खेला जाता है। 
जिला मुख्यालय के कार्यालय मे अक्सर इस तरह के लोगो की चर्चा खूलेआम सूनने को मिल रही है जो करोडो मे खेल रहे है यह सब जानते है लेकिन विरोध करने की क्षमता किसी में नही है । शायद इसी का फायदा उठा कर अब लूट घसोट जारी है। शिक्षा विभाग मे आज के परिवेश मे अबैध धन उगाही जोरो से होती आ रही है । विगत कई वर्षो से शिक्षा विभाग के आलाधिकारी से लेकर निचले स्तर तक धन उगाही जोरो से चलती आ रही है। यह शिक्षा मे आय के स्रोत को अनेक माध्यम से निर्धारित करते है । इन तरह के वसूली के लिये विधिवत कई सफेद पोश शिक्षक के चालू नेता ,व स्थानीय कार्यालय के कर्मचारी व अन्य लोग जो कार्यालय के इर्द गिर्द घूमते नजर आते है । इनकी कमाई बच्चो के मध्यान भोजन ,बच्चो का ड्रेस , शिक्षको का तबादला आदि अनेक माध्यम से होता है। यहा अधिकारी के क्षेत्र से लेकर हर जगह सेटिंग गेटिंग वाले इनके दलाल मिल जायेगे कुछ तो खुद शिक्षक नेता मिल जायेगे जो विद्यालय मे कम कार्यालय  मे अधिक नजर आते है ।अधिकारी के कार्यालय मे तो ऐसे महान कलर्क है कि वह खुले आम रुपया की मांग करते है । उनकी पहुंच सचिवालय तक है।
आज इस विभाग के कर्मचारी जो लिपिक है इनकी तनख्वाह तो बेहद कम है लेकिन किस स्रोत के माध्यम से यह करोडो के मकान बना रखा है। चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी कौन से कुबेर का खजाना पा जाता है कि वह भी करोडो की धन सम्पति बना लेता है । अगर इनकी आय व्यय की गहनता से जांच की जाय तो शिक्षा विभाग मे कई लोग जेल में होंगे।

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