इन दिनों कराके की ठंड और शीतलहर से जहां पूरे बिहार वासी हलकान व परेशान है। वहीं इसका असर कटिहार जिले में भी काफी भयावह  हुआ है। खासकर किसानों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है।
जिले भर के किसान मौसम की बेरुखी और कराके की ठंड शीतलहर से चिंता में डूब गए हैं। किसानों को अब अपनी चिंता छोड़ अपने फसलों की चिंता सताने लगी है। लगभग 3 सप्ताह से ज्यादा कराके की ठंड और पाला गिरने से किसानों का जीना मुहाल हो गया है। शीतलहर के कारण फलका प्रखंड क्षेत्र में लगे मक्का केला आलू एवं सरसों का फसल बुरी तरह प्रभावित हो गया है। किसान सिंचाई खाद और दवाई का छिड़काव कर अपने फसल को बचाने में लगे हुए हैं। वहीं गेहूं के किसानों की बल्ले-बल्ले है। किसान कहते हैं गेहूं की फसलों के लिए ठंड और शीतलहर अमृत का काम कर रही है ।किसान मोहम्मद रफीक उद्दीन असहाय ,जकीर, मोहन, राजेन्दर ,शौकत वगैरह बताते हैं कि पहले तो बाढ़  ने ही हम किसानों का कमरतोड़ दिया था। हम लोगों ने खाद बीज कर्ज लेकर अपने खेतों में लगाया था। और सोचा था फसल कटने के बाद कर्ज वापस कर दूंगा। लेकिन मौसम की मार से हम लोगों के सामने समस्या उत्पन्न हो गया है। किसान शोएब आलम ने कहा कि पहले हम लोगों का मुख्य नकदी फसल केला था। लेकिन उसमें  बीमारी उत्पन्न होने से हम लोगों के लिए मक्के की खेती ही नगदी खेती के रूप में रह गया है। लेकिन मौसम की मार से यह भी बर्बाद हो गया।अब हम लोग क्या करें कुछ समझ में नहीं आता है।वही जिले भर के किसानों का मानना है अगर लगातार मौसम का यही हाल बना रहा तो फसल तो बर्बाद हो ही जाएगा।खरीदे गए बीज खाद का भी ऊपर से हम लोगों पर कर्ज हो जाएगा।वहीं फलका प्रखंड के गोविन्दपुर पंचायत के स्थानीय मुखिया मधु देवी दुःख प्रकट करते हुए कहती है के इस इलाके के किसानों  को पहले बाढ़ ने खसता हाल कर दिया अब मौसम की बेरूखी किसानों को रूला रही है

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