फलका कटिहार
मदरसा दारूल उलूम सबीलुर्रशाद के प्रधानाध्याप शब्बीर अहमद काशमी ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के द्वारा मदरसा इस्लामिया के विरुद्ध दिए गए भाषण  पर दुःख का इजहार करते हुए कहा कि  मुसलमानों में  इस बयान को लेकर काफी क्रोध व गुस्सा का माहौल है। मदारीसे इस्लामिया जहां अमन और शांति की शिक्षा दी जाती है। जहां से हजारों सपूत पैदा हुए हैं। जब भारत में अंग्रेजों का नापाक साया पड़ा और अंग्रेज अपनी चालाकी से यहां का शासक बन बैठे और भारत वासियों पर तरह तरह के जुल्मों सितम के पहाड़ तोड़े जाने लगे और जब हिंदुस्तान को अपना गुलाम बनाने लगा तो ऐसे समय में सबसे पहले अंग्रेजो के विरुद्ध जिस व्यक्ति ने आवाज उठाई  वह मदारिस के  तालीम याफ्ता सपूत हजरत शाह अब्दुल अजीज थे भारत की स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजो के चैलेंज को कबूल करने वाला कोई RSS या बजरंग दल या BJP के लोग नहीं थे। बल्कि इन्हीं मदारिस के छात्र थे। जिसको तारीख मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी के नाम से जानते हैं। स्वतंत्रा संग्राम में शामिल हजरत मौलाना कासिम नानोतवी  हजरत मौलाना हुसैन अहमद मदनी हजरत मौलाना मोहम्मद अली जौहर हजरत मौलाना हसरत अली मोहानी हजरत मौलाना अबुल कलाम आजाद वगैरह मदारिस के बड़े-बड़े विद्वान है। जिसके खूने जिगर से मैसूर की धरती बालाकोट की पहाड़ी शामली के मैदान पटना बक्सर की सर जमीन लाल है। इन विद्वानों को आज भी यह धरती पुकारती है। वसीम रिजवी साहब आप पहले इतिहास पढ़ लीजिए फिर आपको मालूम होगा कि मदरसे में पढ़ने और पढ़ाने  वाला आतंकी है या अमन व शान्ति का प्यामवर। वसीम रिजवी इस तरह के बयान देकर अपनी कुर्सी को बताना चाहते हैं। RSS और BJP को खुश करना चाहते हैं। मैं वसीम रिजवी से कहना चाहता हूं कि मदारिस में शांति की शिक्षा दी जाती है। अपने पूर्वजों के तौर-तरीकों की शिक्षा दी जाती है। मदरसों के कहीं दूर दूर तक भी आतंकवादी से संबंध नहीं है ।अगर मदारिस में आतंकवादी की शिक्षा दी जाती तो आज हिंदुस्तान के पक्के सच्चे मुसलमान अपने बच्चों को मदरसो में तालीम नहीं दिलवाते। वसीम रिजवी ने इस तरह का बयान देकर मुसलमानों के जज्बात को ठेस पहुंचाया है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि आप हिंदुस्तान के मुसलमानों से माफी मांगे और अपने बयान को वापस ले।

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