कम तापमान के कुप्रभाव से फसलों को बचाने का  सुझाव दिए :डॉ ए सतार

चीफ एडिटर कृष्ण कुमार संजय 
समस्तीपुर जिले के स्थित  डॉ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय पूसा के नोडल अधिकारी डॉ ए सतार  ने कम तापमान के कुप्रभाव से फसलों को बचाने का  सुझाव दिए
>अगर फसल के पतियों पर रोग के धब्बे दिखाई दें तो मेंकोजयदवा का दो ग्राम प्रति लिटर पानी में घोलकर छिर्काव करें
>आम एवं लीची के  बागों में निकाई गुराई नही करें ,ऐसा करने से पेड़ों में पुष्पन की क्रिया तथा फलन प्रभावित होगा ,अभी   बागों में सिचाई नही करें इससे  पौधों  में   फलो के जगह नये पते निकलने की सम्भावना बढ़ जाती है |
>दुधारू पशुओं को रख रखाव एवं खानपान पर विशेष नजर रखें ,खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें ,आहार में   प्र याप्त मात्रा में केल्सियम प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा   विटामिन्स खनिज लवण एंटीबायोटिक का समावेस करें |
>मक्का की फसल में अवास्य्क्तानुसार सिचाई करें ,सिंचाई के बाद 25से 30 किलो ग्राम   नेत्रजन प्रति हेक्टेयर  की दर से  उप्निवेस करें |
>राई सरसों में सफ़ेद रतुया तथा अल्टरनेरिया पत्र्लान्क्ष्ण रोग की निगरानी करें ,प्रकोप दिखाई देने पर मेंकोज्य दवा   दो ग्राम प्रति लिटर की दर से    घोल बनाकर   मौसम साफ़ रहने पर छिरकाव करें |
>आलू फसल की नियमित जांच करें झुलसा रोग से बचाव के लिए रिडोमिल नामक दवा का 1.5ग्राम प्रति लिटर पानी  दर से घोल बनाकर छिरकाव करें , टमाटर ,मटर एवं
>बिलम्ब से बोई गेंहू की फसल   30  से 35दिनों को हो गयी उसमे सिंचाई के बाद चौरी पत्ती,खरपतवार होने पर 2,4डी सोडियम लवण  प्रति हेक्टेयर एक किलो ग्राम तथा संकरी पति खरपतवार होने पर क्लोदिनोफाप 60 ग्राम सक्रिय तत्व 400लिटर पानी में   घोल बनाकर छिर्काव करें
  मक्का की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें |

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