जानिए बसंत पंचमी की तिथि पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व महत्व, सरस्वती देवी का श्रेष्ठ दिन                                                        

बसंत पंचमी 22 जनवरी 2018

 विद्या और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था। यह वसंत पंचमी इस बार 22 जनवरी दिन सोमवार को पड़ रही है। वसंत पंचमी सोमवार के दिन पड़ने पर इस दिन का बहुत ही महत्व माना गया है। बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त- 07:17 से 12:32 बजे तक रहेगा व पंचमी की तिथि - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018) से 16:24 बजे (22 जनवरी 2018) तक रहेगी।

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनाई जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं।

प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बांटा गया है। वसंत ऋतु लोगों का सबसे मनचाहा मौसम है। जब फूलों पर बहार आती है, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूं की बालियां खिलने लगतीं है। आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियां मंडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता है जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण दिखाई देता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का समय - 07:17 से 12:32 बजे तक

पंचमी तिथि का आरंभ - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018) से 16:24 बजे (22 जनवरी 2018) तक
सबसे पहले माता सरस्वती का ध्यान करें

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। 
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। 
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।। 
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं । 
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।। 
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् । 
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।

पर्व का महत्व

वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है और नई चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।

कहा जाए तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला होता है, पर वसंत पंचमी (माघ शुक्ल 5) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं।

ऐसे करें बसंत पंचमी पूजा

1. प्रात:काल स्नाना करके पीले वस्त्र धारण करें। 
2. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें। 
3. मां सरस्वती की पूजा करें। 
4. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं। 
5. माता का श्रंगार कराएं ।
6. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। 
7. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं। 
8. श्वेत फूल माता को अर्पण करें।

कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है। विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें। संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व मां को बांसुरी भेंट करें।

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