सेटबैक और पार्किंग की जगह हो रहा दुकानों का निर्माण

  विनय कुमार मिश्र

गोरखपुर।जीडीए में व्याप्त भ्रष्टाचार से आज शहर के व्यस्ततम इलाके रेती रोड़, कोतवाली रोड़ और नखास पुलिस चौकी तथा घण्टाघर समेत शहर के लगभग हर हिस्से में अवैध व मानक के विपरीत व्यवसायिक निर्माणों की बाढ़ सी आ गई है। इन निर्माणों में सबसे महत्वपूर्ण सेटबैक और पार्किंग पूरी तरह से गायब हैं और इनकी जगह दुकानों ने ले ली हैं।
घोषकम्पनी से रेती रोड़ पर कुछ वर्षों पहले आनन्द काम्प्लेक्स का निर्माण किया गया जिसमे पार्किंग की जगह दुकानों ने ले ली और वहां के दुकानदारों व ग्राहकों की गाड़ियाँ सड़क पर खड़ी होने लगी। वर्तमान समय में उसके बगल में उसी तर्ज पर नियम कानून को ताक पर रख एक नए काम्प्लेक्स का निर्माण हो चुका है तथा कुछ और नए निर्माण अभी हो रहे हैं जिससे जाम की समस्या और बढ़ेगी।
इसी प्रकार कोतवाली इलाके में नखास पुलिस चौकी के बगल में व्यवसायिक निर्माण जोरो से चल रहा है। यहां निर्माण के लिए धार्मिक आस्था को दरकिनार करते हुए पुलिस चौकी के अंदर लगे पीपल के पुराने पेड़ की डालियों को काट दिया गया। स्थानीय लोगों की माने तो यहां निर्माण करा रहे बिल्डर दबंग किस्म के लोग हैं जिन्हें समाजवादी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त है ।
हाल यह है कि अवैध निर्माण को लोगों की नज़रों से बचाने के लिए जर्जर दिवार को छोड़ दिया गया जबकि पुराने भवन को तोड़ा जा चुका है । नखास पुलिस चौकी के पास खड़ी यह दिवार कभी भी एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके अलावा यहाँ जो निर्माण हो रहा है वह बिना सेट बैक छोड़े सड़क से सटा कर किया जा रहा है । इस सम्बन्ध में जब जीडीए अभियंता अशोक सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी वह नये आये हैं लेकिन अगर नियम के विरुद्ध कोई निर्माण हो रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। बहरहाल इन निर्माणों को लेकर जीडीए अभी तक आँख बंद किये हुए नज़र आ रहा है।
इसके अलावा इन निर्माणों के जरिये सरकार को राजस्व की भी हानि हो रही है। यहाँ जो भी निर्माण किया जा रहा है वो बिल्डर एग्रीमेन्ट के ज़रिये हो रहा है, इनके द्धारा जीडीए में जमा नक़्शे में दुकानों की संख्या कम दिखाई गई है जबकि मौके पर उससे कही ज्यादा दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। फ़िलहाल जीडीए के अधिकारियों ने इन अवैध निर्माणों पर चुप्पी साध रखी है और इस ख़ामोशी से ऐसा लग रहा है जैसे जीडीए के अधिकारी भी इन व्यवसायिक निर्माण में अदृश्य हिस्सेदार है और उनका हिस्सा निर्माण से पहले ही दिया जा चुका हो।
कोतवाली इलाके में अवैध निर्माण के बावत जब इंस्पेक्टर कोतवाली माधव प्रसाद द्रिवेदी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि निर्माण को देखने की पूरी जिम्मेदारी जीडीए की है अगर अवैध निर्माण को लेकर वहां से कोई नोटिस जारी होती है तो उसके अनुरूप कार्यवाही की जायेगी।

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