बसन्त पंचमी पर गैनहवा आश्रम में जुटे श्रद्धालु

हरीश कुमार यादव के शाथ उमेश तिवारी की रिपोर्ट, श्रावस्ती से 
भारत की भूमि अनेक महान योगियों, तपस्वियो , ऋषियों, महात्माओं व पुन्य आत्माओं के योगदान और महान कार्यों को न केवल उनके जीवित रहने तक ही याद करती है बल्क़ि उनके लिये विशेष तिथि प्रदान कर उनके योगदान को नयी पीढ़ी तक पँहुचाया जाना भारतीय परम्परा रही है । देश के महान ऋषि महात्माओं ने उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में अपना तपस्या स्थल व जन्म स्थल बनाया जिसमें गोंडा , श्रावस्ती सहित कयी जिले प्रचलित हैं  ।
कुछ महान महात्माओं जैसे ब्रह्मर्षि देवरहवा बाबा ,झालीधाम के बाबा व गैनहवा बाबा के कार्यों और तप के प्रभाव से कौन अनजान है । इनके यश से  शायद कोई ही ऐसा हो जो अछूता हो । 
देवीपाटन मंडल में  श्रावस्ती जनपद के  बसन्तपुर बनकट ग्रामसभा  के छेत्र से गुजरनेवाली कुवानौ नदी व जंगलों के बीच लगभग एक एकड़ जमीन में बने परम पूज्य महर्षि  गैनहवा महाराज  के तपोस्थली रामजानकी मंदिर पर सोमवार को बसन्त पंचमी के अवसर पर हज़ारोँ की संख्या में भक्तों का जमावड़ा लगा रहा ।
यहां पूरे दिंन दर्शन , हवन,  पूजन,  यज्ञ और रामाधुन के साथ भव्य भंडारे से गैनहवा बावा की येह पवित्र स्थली एक बार फिर  भक्तिमय रंग में डूबी नजर आयी  ।
यह प्रसिद्द गैनहवा बाबा तपस्थली श्रावस्ती जिले  के दक्षिणी छोरपर बहराईच गोंडा व बलरामपुर जि़लों के सरहद  के काफी करीब है ।  यह चारो जनपदों के बिल्कुल करीब में होने के कारण सभी जि़लों के हज़ारोँ श्रद्धालु गैनहवा बाबा के तपस्थली में वसंतोत्सव पर्व पर दर्शन पूजन को पूरे दिंन जमे रहे ।
बाताते चलें कि यह तपोस्थली जो श्रावस्ती जनपद के सबसे आखिरी और दक्षिणी छोर पर स्थित है ज़हां कूवानो नदी व इसी से सटे जंगल के मध्य होने के कारण इसकी विविधता को और बढा़ता है । साथ ही विगत लगभग दो दशक बाद इस मंदिर को महंथ मिलने की खुशी में श्रद्धालुओं का हूजूम टूट पडा ।
यहां के 57 वर्षीय वर्तमान महंथ बाबादयाराम जी महाराज फलाहारी जो विज्ञान की  शुरुवाती शिक्षा के साथ इंजिनियरिंग करके विगत  25 वर्षों से वैराग्य धारण कर ईश्वर भजन व तप में लीन रहते हैं ने हाल ही में यहां की गद्दी सम्भाली है ।  जिन्हे पूर्व महंथ व संस्थापक  गैनहवाबाबा जी महाराज  के गुरुभाई व इस मंदिर के वर्तमान सर्वराकार संत रामसेवकदास महंथ ने वर्तमान महन्त को यहां के गद्दी की जिम्मेदारी सौंपते हुये देखरेख का जिम्मा भी  सौंपा है । जो अयोध्याधाम के विश्वचर्चित व श्रीराममंदिर आंदोलन से जुडे  संत स्वामीनृत्यगोपालदास जी महाराज के शिष्य हैं । 
गैनहवा आश्रम के वर्तमान महन्त बाबा दयारामदास ने बताया कि यह पावन पुन्य तपोस्थली जिसकी मुझे जिम्मेदारी मिली है यह रामजानकी ट्रस्ट अयोध्याधाम द्वारा सँचालित है इस मंदिर के नाम 75 बीघा जमीन है जिसे कुछ स्थानीय लोगों ने जालसाजी करके अपने नाम करा लिया है जो अनुचित है । यहां के तात्कालीन महन्त बद्रीदास ने जो वर्ष 1987-1991 तक सर्वराकार थे उसी दौरान कुछ स्थानीय दबंग लोगों ने जालसाजी करके इस आश्रम की लगभग 60 बीघा जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम करा लिया था जो आजतक कब्ज़ा ज़माये हैं । तब से इस स्थल पर किसी महंथ को ये दबंग न तो रुकने देते हैं न ही यज्ञ या पूजा पाठ ही करने देते रहे हैं ।  विगत तीन माह पूर्व मेरे गुरु रामसेवक दास जी महाराज ने मुझे इस तपोस्थली की सेवा का आदेश देते हुये मुझे यहां के लिये भेजा । मैं तब से आश्रम की सेवा के लिये जुटा हूँ ।
एक भव्य यज्ञ हवन व भंडारे का आयोजन विगत दिसम्बर माह में सम्पन्न हुँआ है । इसी क्रम में पूज्य महंथ जी के समय से स्थापित परम्परानूसार यज्ञ व भव्य भंडारे का भी आयोजन किय़ा गया ।  
जिसमें पधारे स्थानीय सांसद दद्दन जी मिश्र से अपनी समास्याओं को बताया गया और आश्रम के विकास के लिये कुछ मांग भी की गयी ।
बसंत पंचमी के अवसर पर भी गैनहवा आश्रम पर भव्य भंडारे का आयोजन स्थानीय जनता के सहयोग से किय़ा गया । महंथ ने जालसाजी से बैनामे के कब्जेदारों से तत्काल रामजन्म भूमि व गैनहवा आश्रम की जमीन छोड़ देने की अपील करतें हुये सबसे सहयोग की माँग  की है । 

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