रिपोर्ट- अमित कुमार उरई

जालौन।
 उरई शहर के जेल रोड़ पर स्थित सरकार पैलेस में आज 03/02/2018 को 01 फरवरी को देश के 2018-19 के बजट आने के बाद व उत्तर प्रदेश सरकार के 2018 -19 के बजट आने से पहले बजट विश्लेषण व मांग को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
वही बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक-कुलदीप कुमार बौद्ध का कहना है।कि इस वजट से दलित व आदिवासियों के साथ न इंसाफी है।और बताया कि वित्त मंत्री जी ने रु24,42,313.30 करोड़ का बजटव्यय पेश किया।एससीसी-एसटीसी के अंतर्गत आवंटन अनिवार्य राशि से नीचे है।वर्तमान वर्ष में कुल व्यय बजट का दलितों के लिए सिर्फ रु!56,619 करोड़ आवंटित किया गया है।जो6.55%है जबकि 143,000 करोड़ होना चाहिए था।लेकिन 86,000 करोड़ रुपये दलितों को कम दिया है।वही आदिवासियों के लिए रु .39,135 करोड़ जो 4.53% है।जबकि 74,000 करोड़ होना चाहिए था।लेकिन34,000 करोड़ रुपये कम दिया है।और कहा कि एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान चला रही हैं।और वही दूसरी ओर जनपद जालौन के ग्रामीण क्षेत्रों में मेला ढ़ोने का काम चल रहा है।
केंद्रीय बजट 2018-19 पे टिप्पणी करते हुए।
राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान रिहाना मंसूरी व नन्दकुमार ने कहा जब हम विकलांग छात्रों को छात्रावर्ति के लिए रु12.56 करोड़ के आवंटन का स्वागत करते है,पर उच्च शिक्षा के लिए हानिकारक है एवं उससे भी चिंताजनक नीति आयोग द्वारा एससीसी व एसटीसी को डिजाइन करने के लिए दिशानिर्देशों की कमी है और संबंधित मंत्रालयों ने विशेष घटक योजना को भी कमजोर किया है।जिसे विकास के अंतर को कम करने के लिए बनाया गया है।
प्रमुख माँगे-* वित्त वर्ष 2017-18 में एससीसी के अधीन रु.10,44,90.45 करोड़ एवं एसटीसी के तहत रु.49,357.49 करोड़ रुपये, की कमी हुई थी।दिशानिर्देशों के अनुसार अनुसूचित जातियों व जनजातियों को वंचित कर दिया गया था।नोडल मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने होंगे कि बजट आवंटन जनसंख्या प्रतिशत के अनुसार किया जाय।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा तत्काल कदम उठाने की जरूरत है जो क्रमशः एससीसी एव एसटीसी के कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय भी है।यह सुनिश्चित करें कि सभी जरूरत के मंत्रालय घटक स्कीम में निर्धारित फण्ड का आवंटन एवं क्रियान्वयन करें ऐसा नहीं करने वाले मंत्रालय के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।
मौजूद रहे- कुलदीप कुमार बौद्ध, रिहाना मंसूरी, नन्दकुमार, अनुराधा चौधरी, गुल्फ़सा, अनीता,कृष्ण कुमार प्रजापति, संजय वाल्मीकि* उपस्थित रहे।

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