प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कसौटी पर उतरने की बारी है। केंद्रीय बजट के संदेश को किसानों और गरीबों पर खुले हाथ के रूप में समझें या मिडिल क्लास के खाली हाथ के रूप में, दोनों ही स्थितियों में अब कसौटी पर योगी हैं।*

उन्हें 8 फरवरी से शुरू हो रहे प्रदेश के बजट सत्र में न सिर्फ 2019 के चुनावी खाके में भाजपा की चमक बढ़ाने वाले रंग भरने हैं बल्कि केंद्रीय बजट में की गई घोषणाओं को जमीन पर उतारने का संदेश भी लोगों को देना है।

दरअसल, मोदी सरकार के बजट को लेकर जिस तरह की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आयकर की सीमा न बढ़ाए जाने से नौकरीपेशा लोगों की नाराजगी सामने आई है। 
उसके बाद योगी की चुनौती और बढ़ गई है। कारण, आबादी के लिहाज से और लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 सीटें होने के कारण उत्तर प्रदेश का विशिष्ट महत्व है। यूपी में जीत की डोर सीधे-सीधे केंद्रीय सत्ता के भविष्य को तय करती है।
अतीत के चुनाव नतीजे इसका प्रमाण हैं। समझा जा सकता है कि योगी और उनके बजट से लोकसभा चुनाव में भाजपा का भविष्य किस तरह जुड़ा है।

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