मुख्यमंत्री जी पोंछ दीजिये खून के आंसू, भुखमरी की कगार पर आ चुके हैं

विनय कुमार मिश्र 

गोरखपुर।हाल ही में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश गोरखपुर में पहुंचे हुए थे और उन्होंने दिव्यांग जनों को उपकरण प्रदान करके प्रदेशवासियों के द्वारा खूब वाहवाही लूटी थी, परंतु चिराग तले अंधेरे कि कहानी भी दिव्यांग जनों को लेकर उभर कर आ रही है जिसमें शायद उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगाहें इन तक नहीं पहुंच रही हैं।जी हां दिव्यांग मरीजों के उपचार एवं पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार द्वारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में पीएमआर( भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास) विभाग की स्थापना वर्ष 2010 में की गई थी जिसमें तीन चिकित्सकों सहित 11 कर्मचारियों की तैनाती संविदा के तहत चयन प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए की गई थी।। इस विभाग की स्थापना के उपरांत वाह वाहियों का सिलसिला चारों ओर हुआ और लगा कि इस विभाग में अब बदलाव आएगा डॉक्टर एवं कर्मचारियों की तैनाती के बाद इंसेफ्लाइटिस एवं मार्ग दुर्घटना में दिव्यांग हुए मरीजों का उपचार इस विभाग में सुचारू ढंग से प्रारंभ हो गया। सब कुछ ठीक चलने लगा परंतु समय के साथ-साथ परिस्थितियों में   भी बदलाव होने लगा और इस विभाग के प्रति सरकार की उदासीनता नजर आने लगी और कर्मचारियों के वेतन समयानुसार नहीं मिलने लगे। इस उदासीनता के चलते और पारिवारिक स्थिति को और बिगड़ते हुए देख दो डॉक्टरों ने इस विभाग से नाता तोड़ लिया और प्राइवेट प्रैक्टिस करने लगे इस संबंध में इन कर्मचारीगण के द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से लगातार  अपनी समस्या को बताया गया है परंतु इस संबंध में कोई विशेष बदलाव आज भी देखने को नहीं मिल रहा है।विडंबना देखिए की इन संविदा कर्मियों का वेतन 36 माह से रुका हुआ है और इन बेसहारों के परिवार का कोई सहारा नहीं है इनमें से कुछ परिवार को देखकर आपके भी आंसू टपक पड़ेंगे कि इनका परिवार किस प्रकार जीवन यापन कर रहा है।अब सूबे के मुखिया की नजर इन पीड़ितों पर कब पड़ती है और इनके दिन कब बदलेंगे यह आने वाला वक्त ही बताएगा परंतु इनकी स्थिति तिल-तिल कर मरने वाली बेहद संवेदनशील है।

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