दो घटनाअों के बाद जागी सरकार, अब हरियाणा में इलाज के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं

सुनील वर्मा की रिपोर्ट :
पानीपत: गुरुग्राम में आधार कार्ड न होने पर डिलीवरी के लिए आई महिला को दाखिल न करने पर हरियाणा सरकार ने जल्द कदम उठाते हुए आदेश जारी किया। जिसके तहत अस्पताल में इलाज के लिए अब आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा। इस संबंध में डीजी स्वास्थ्य विभाग सभी सीएमअो को पत्र जारी किए हैं। आदेश के तहत किसी भी अस्पताल में पहले इलाज शुरू किया जाएगा उसके बाद कागजी कार्रवाई शुरू की जाएगी। यदि कोई अस्पताल इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्र में कहा गया है कि इलाज के लिए कोई भी पहचान पत्र दिया जा सकता है। आपातकालीन स्थिति में किसी भी प्रकार के पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं है। मरीज के पास आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र न होने की स्थिति में इलाज में देरी अथवा मनाही न की जाए।
उल्लेखनीय है कि साइबर सिटी गुरुग्राम में एक गर्भवती महिला को आधार कार्ड के अभाव में अस्पताल में भर्ती नहीं करने और उसका प्रसव अस्पताल में बाहर फर्श पर होने की घटना सामने आई थी। इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यह पत्र जारी किया है। राज्य के दौरे पर आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार से जवाब मांगने और जांच कराने की बात कही थी।
इससे पहले हरियाणा के सोनीपत जिले में आधार कार्ड और कागजी कार्रवाई के चक्कर में करगिल शहीद की पत्नी की जान चली गई थी। मृत महिला शकुंतला देवी कारगिल युद्ध में शहीद हवलदार लक्ष्मण दास की पत्नी थीं जो 9 जून 1999 को अपनी जाट रेजिमेंट के साथियों के साथ दुश्मन से लोहा लेते वक्त शहीद हो गए थे। शकुंतला देवी को उनका बेटा गले के कैंसर के कारण सोनीपत के ट्यूलिप हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहता था। इसके लिए शकुंतला देवी को सेना के स्थानीय कार्यालय से रेफर भी किया गया था लेकिन मौके पर आधार कार्ड मौजूद ना होने के कारण अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पवन मां को लेकर फिर सेना के स्थानीय कार्यालय लौट आए जहां उन्होंने किसी और अस्पताल के लिए रेफरल लेटर लेने की प्रक्रिया शुरू की। अभी पवन शकुंतला देवी को किसी अन्य अस्पताल में ले जा पाते इससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई थी।

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