वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ अमूल्य श्रीवास्तव ने दिया परीक्षा का तनाव मनोवैज्ञानिक उपायों से बचाव पर टिप्स
     विनय कुमार मिश्र
गोरखपुर।विश्वविद्यालय से लेकर बोर्ड तक इन दिनों परीक्षाओं का दौर  शुरू हो गया है। परीक्षा तिथियां घोषित होते ही परीक्षा तैयारी में जुटे कई परीक्षार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याएं आने लगती है। ज्यादातर समस्याएं याद न रहने, परीक्षा का तनाव होने, तैयारी के बाद भी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने के हैं। उनका समाधान निकालने के लिए अचिन्त्य वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में देश के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक काउंसलर डॉ अमूल्य श्रीवास्तव ने महानगर के आरपीएम एकेडमी रुस्तमपुर में एक विशाल शिविर लगाकर विद्यर्थियों की काउंसलिंग किया ।शिविर में डॉ अमूल्य ने तनाव, अवसाद के साथ विद्यर्थियों के की समस्याओं का विस्तार से समाधान बताया।तनाव के संबंध में डॉ अमूल्य ने बताया कि  हल्के मात्रा में दबाव तथा तनाव कभी-कभी फ़ायदेमंद होता है। उदाहरण के लिए कोई प्रोजेक्ट या असाइन्मेंट पूरा करते समय हल्का दबाव मसहूस करने से हम प्रायः अपना काम अच्छी तरह से पूरा कर पाते हैं और काम करते समय हमारा उत्साह भी बना रहता है। तनाव दो प्रकार के होते हैं: यूस्ट्रेस ("सकारात्मक तनाव ") तथा डिस्ट्रेस (नकारात्मक तनाव), जिसका सामान्य अर्थ चुनौती तथा अधिक बोझ होता है। जब तनाव अधिक होता है या अनियंत्रित हो जाता है, तब यह नकारात्मक प्रभाव दिखाता है।यह किसी ऐसे शारीरिक, रासायनिक या भावनात्मक कारक के रूप में समझा जा सकता है, जो शारीरिक तथा मानसिक बेचैनी उत्पन्न करे और वह रोग निर्माण का एक कारक बन सकता है। ऐसे शारीरिक या रासायनिक कारक जो तनाव पैदा कर सकते हैं, उनमें - सदमा, संक्रमण, विष, बीमारी तथा किसी प्रकार की चोट शामिल होते हैं। तनाव के भावनात्मक कारक तथा दबाव कई सारे हैं और अलग-अलग प्रकार के होते हैं। कुछ लोग जहां “स्ट्रेस” को मनोवैज्ञानिक तनाव से जोड़ कर देखते हैं, तो वहीं वैज्ञानिक और डॉक्टर इस पद को ऐसे कारक के रूप में दर्शाने में इस्तेमाल करते हैं, जो शारीरिक कार्यों की स्थिरता तथा संतुलन में व्यवधान पैदा करता है। जब लोग अपने आस-पास होने वाली किसी चीज़ से तनाव ग्रस्त महसूस करते हैं, तो उनके शरीर रक्त में कुछ रसायन छोड़कर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। ये रसायन लोगों को अधिक ऊर्जा तथा मजबूती प्रदान करते हैं।तनाव के प्रभाव के संदर्भ में डॉ अमूल्य ने बताया कि तनाव के शारीरिक प्रभाव मुख्यतः न्यूरो-एंडोक्राइनो-इम्युनोलॉजिकल मार्ग से उत्पन्न होते हैं। तनाव के कारक की जो भी प्रकृति हो पर उनके प्रति शरीर की प्रतिक्रिया सदैव एक समान रहती है।हृदय का स्पंदन बढ़ जाता है।सांस बढ़ जाती है, और इसकी लंबाई छोटी हो जाती है।थरथराहट जुकाम, अत्यधिक चिपचिपाहट /पसीना छूटना गीली भौंह मांसपेशियों का कड़ापन, उदरीय मांसपेशियों का कड़ापन दिखना, तने हुए हाथ तथा पैर, दबे हुए जबड़े जहां दांत एक-दूसरे के साथ गुंथे हों।डिस्पेप्सिया /आंत में व्यवधान बार-बार पेशाब के लिए जाना,बाल झड़ना आदि है वहीं मानसिक प्रभाव के लिये
यदि पहचान न की जाए और सही तरीके से सुधारा न जाए तो तनाव के मानसिक प्रभाव कई रूप में दिखाई पड़ते हैं। यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि भावनात्मक तनाव को यदि दूर न किया गया तो यह इससे मानसिक कष्ट उत्पन्न हो सकता है और उससे शारीरिक परेशानी (मनोशारीरिक बीमारी के रूप में जाना जाता है) उत्पन्न हो सकता है।सामान्य मानसिक प्रभाव में एकाग्र करने में अक्षम होना।निर्णय न ले पाना।आत्मविश्वास की कमी।चिड़चिड़ापन या बार-बार गुस्सा आना।अत्यधिक लोभ वाली लालसा।बेवजह चिंता करना, असहजता तथा चिंता।बेवजह भय सताना।घबड़ाहट का दौरा।गहरे भावनात्मक तथा मूड विचलन के साथ तनाव के व्यवहारगत प्रभावों ऐसे तरीके शामिल हैं, जिनमें कोई व्यक्ति तनाव के प्रभाव में कार्य करते हैं जैसे अत्यधिक धुम्रपान नर्वस होने के लक्षण शराब या ड्रग्स का अत्यधिक सेवन।नाखून चबाने तथा बाल खींचने जैसी आदत।अत्यधिक तथा काफी कम खाना।मन का कहीं और खोना।जब-तब दुर्घटना का शिकार होना।जरा-जरा सी बात पर आक्रामक होना। यह देखा गया है कि व्यवहारगत तनाव के काफी खतरनाक प्रभाव होते हैं और इससे अभिव्यक्ति तथा सामाजिक संबंध प्रभावित होते हैं।काउंसलिंग शिविर में डॉ अमूल्य ने तनाव दूर करने के लिए सभी के लिये महत्वपूर्ण टिप्स दिये।जैसे
              
      परिस्थिति को बदलें।
तनाव पैदा करने वाले कारकों से बचे।तनाव पैदा करने वाले कारकों को बदलें।
   अपनी प्रतिक्रिया में बदलाव लाएं।
तनाव पैदा करने वाले कारकों के मुताबिक अनुकूलित हो जाएं।तनाव पैदा करने वाले कारकों को स्वीकार कर लें।
अनावश्यक तनाव से बचें।
नहीं’ कहना सीखें– अपनी सीमा को जानें और हमेशा उसका ध्यान रखें। व्यक्तिगत या व्यावसायिक जीवन हो आप क्षमता से अधिक जिम्मेदारी लेने से बचें। क्षमता से अधिक जिम्मेदारी उठाने से आप तनाव के शिकार हो सकते हैं।ऐसे लोगों से बचें जिनसे आपको तनाव पैदा होता है: यदि कोई व्यक्ति आपके जीवन में निरंतर रूप से तनाव पैदा कर रहा है और आप उस संबंध को सही नहीं कर पा रहे हैं, तो आप उस व्यक्ति के साथ व्यतीत करने वाले समय में कमी कर दें या उस संबंध को पूरी तरह से समाप्त कर लें।अपने परिवेश को नियंत्रण में रखें: यदि शाम की ख़बरें आपको चिंतित कर जाती हैं, तो आप शाम में टीवी ऑफ रखें। यदि ट्रैफिक से आप तनाव ग्रस्त हो जाते हैं तो भले ही दूर वाली पर कम भीड़-भाड़ वाली सड़क लें। यदि आपको बाजार जाना अच्छा नहीं लगता तो आप ऑनलाइन शॉपिंग कर लें।गर्मागर्म विषय से बचें: यदि आप धर्म या राजनीति की चर्चा पर परेशान हो जाते हैं तो आप उनपर बातचीत करने से बचें। यदि आप एक टॉपिक की हमेशा चर्चा उसी इंसान से करेंगे तो आप चर्चा करने से अपने आप को बचाएं या उसे टाल जाएं।आपको क्या करना है उसकी सूची बनाएं: अपने कार्यक्रम, जिम्मेदारियों और दैनिक कार्यों का विश्लेषण करें। यदि बहुत सारी चीज़ें शामिल हो जाती हैं तो आप उनमें से ‘करने लायक’ या ‘जरूरी’ के रूप में छांट लें। जो कार्य जरूरी न हों आप उन्हें हटा सकते हैं, या से सूची में सबसे नीचे रखें।
परिस्थिति में बदलाव लाएं।
अपनी भावनाओं को दबाने की बजाएं उसे व्यक्त करें। यदि कोई व्यक्ति या कोई चीज़ आपको परेशान करती है तो उसके बारे में आप उस व्यक्ति से खुलकर पर सम्मानपूर्ण तरीके से बात करें। यदि आप अपनी भावनाओं का इज़हार नहीं करेंगे तो आपके मन में असंतोष पैदा होगा और स्थिति जस की तस बनी रह सकती है।समझौता करने की चाह रखें: यदि आप किसी व्यक्ति को उसका व्यवहार बदलने के लिए कहते हैं तो आप भी अपने आप में बदलाव लाने के लिए तैयार रहें। यदि आप दोनों थोड़ा भी बदलाव ला सकें तो आपकी स्थिति बेहतर हो सकती है।
अधिक निश्चयात्मक बनें:
अपनी जीवन के पिछले पायदान पर न रहें। सामने जो भी समस्या आये उसका डट कर और दक्षता पूर्वक मुकाबला करें। यदि आपकी परीक्षाएं आने वाली हैं और आपका बातूनी दोस्त आपके यहां आ जाए तो आप ठान लें कि आपको उसके साथ केवल कुछ मिनटों की बातचीत करनी है।अपने समय का बेहतर प्रबंधन करें: समय का सही तरह से नियोजन न करने से तनाव पैदा हो सकता है। जब आपके पास समय कम पड़ रहा हो या आप समय के साथ पिछड़ रहे हों तो शांत और एकाग्र रहना नामुमकिन हो जाता है। पर यदि आप नियोजन के साथ चलेंगे तो आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा और आप अपने तनाव को काफी कम कर सकते हैं।
तनाव पैदा करने वाले कारकों के अनुसार अनुकूलित होना
समस्याओं को नए नजरिए से देखिए: तनावग्रस्त परिस्थितियों को अधिक सकारात्मक नजरिए से लें। किसी ट्रैफिक जाम पर गुस्सा होने की बजाए, आप उसका इस्तेमाल विराम लेने, अपने आप को पुनः तैयार करने, रेडियो पर अपनी पसंदीदा रेडियो स्टेशन के कार्यक्रम सुनने और कुछ समय अकेले में बिताने के एक मौके के रूप में करें।बड़ी तस्वीर पर नजर डालें। तनाव ग्रस्त परिस्थिति के नजरिए से देखें: अपने आप से पूछें कि लंबे समय तक इसका रहना कितना अहम होगा। क्या यह एक महीने, एक साल तक चलेगा? या यह लंबे वक्त तक चलेगा? क्या सचमुच इससे परेशान हुआ जा सकता है? उत्तर यदि नहीं होता है, तो अपना ध्यान और ऊर्जा किसी अन्य जगह लगाएं।अपने मानदंडों को समायोजित करें: हर काम को पूरी दक्षता (पर्फेक्शन के साथ) से करने से तनाव से बचा जा सकता है। महज पर्फेक्शन की मांग की वजह से आप अपने आप को असफलता के हवाले न कर दें। अपने तथा अन्य व्यक्तियों के लिए उचित मानदंड तय करें और ‘पर्याप्त गहराई’ के साथ काम करने की आदत डालना सीख लें।
सकारात्मक बातों पर ध्यान केंद्रित करें: तनाव जब आप तनाव के गिरफ्त में आ रहे हों तो आप उन सभी चीजों के बारे में सोचें जिनकी आप अपने जीवन में तारीफ करते हैं, जिनमें आपके सकारात्मक गुण और ईश्वर के दिए तोहफे भी शामिल हैं। इन सरल उपायों से आपको सही दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी।
जिन चीज़ों को बदल न सकें उसे स्वीकार करना सीखें।
तनाव के कुछ स्रोत अनिवार्य होते हैं। ऐसे कारकों से आप बच नहीं सकते या आप उन्हें बदल भी नहीं सकते, जैसे किसी परिजन की मृत्यु, कोई गंभीर बीमारी, या कोई राष्ट्रीय मंदी। ऐसी स्थिति में उपजे तनाव से उबरने का सबसे अच्छा तरीका है चीजों को उसी रूप में स्वीकार कर लेना। भले ही स्वीकार करना कठिन होगा पर दीर्घकालिक रूप से उस परिस्थिति के विरोध में खड़ा होना जिसे आप बदल नहीं सकते, के मुकाबले यह अधिक आसान और फ़ायदेमंद होगा।
नियंत्रण न हो सकने वाली चीज़ों पर नियंत्रण करने का प्रयास न करें।
जीवन में कई चीज़ें नियंत्रण से बाहर होती है- खासकर अन्य लोगों के व्यवहार। उनसे परेशान होकर तनाव लेने बेहतर होगा कि आप ऐसी चीज़ों पर अपना ध्यान केंद्रित करें जिन्हें आप अपने नियंत्रण में ला सकते हैं, जैसे कि ऐसा तरीका जिसे आप समस्याओं से निपटने के लिए चुनते हैं।सदैव आगे की ओर देखें। कहते हैं: “जो हमें मार नहीं सकता, वह हमें मजबूत बनाता है।” बड़ी चुनौतियों से मुकाबला करते समय आप उन्हें अपने निजी अनुभव के एक मौके के रूप में देखें। यदि आपका गलत चयन आपको तनाव का शिकार बना डालता है, तो आप उनपर विचार करें और अपनी गलतियों से सीखें।
अपनी भावनाओं को बांटें:
भरोसेमंद लोगों से बात करें या किसी थेरॉपिस्ट से परामर्श प्राप्त करें। यदि आपनी भावनाओं को दूसरों को बताते हैं, तो भले ही आप उसे बदल न सकें पर इससे आप हल्का महसूस करेंगे।माफ करना सीखें ।कार्यक्रम में डॉ अनुभूति दुबे ने कहा  हम एक हम एक अधूरी दुनिया में जी रहे हैं, जहां लोग बार-बार गलतियां करते हैं। क्रोध और नाराजगी को मन से बाहर निकालें। दूसरों को माफ कर आप अपनी नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होते हैं और जीवन में आगे की ओर बढ़ते हैं।
       
       शिविर के दौरान विद्यार्थियों के कुछ आम समस्याओं को सुनकर उसका निवारण भी किया गया।
समस्या : पूरी मेहनत करने पर भी अंक कम मिलते हैं। स्कूल की पढ़ाई समझने में दिक्कत होती है। परीक्षा के समय आत्मविश्वास कम हो जाता है।
परीक्षण में नतीजा : आईक्यू सामान्य निकला। ऊर्जा का अपव्यय ज्यादा हो रहा है। ऊर्जा अपव्यय से मन थका रहता है।
उपाय सुझाए : पूरे 24 घंटे की समय सारिणी (स्कूल खाना, खेलना, मनोरंजन, भोजन व नींद आदि) बनाकर उसी के अनुसार चलें।
समस्या : याद करने के कुछ समय बाद ही भूल जाते हैं। लगता है कि परीक्षा में कुछ नहीं कर पाएंगे।
परीक्षण में नतीजा : आईक्यू सामान्य। पढ़ाई का समय तय नहीं। अपेक्षित वातावरण का अभाव।
उपाय सुझाए : जो याद करें, उसे तुरंत लिखें। सोने से पहले पढ़े कोर्स का एक बार रिवीजन जरूर करें। हल्का भोजन लें।
समस्या : दिन भर पढ़ाई परंतु नतीजा बहुत कमजोर। बोझ बनती जा रही पढ़ाई।
परीक्षण में नतीजा : आइआइटी से इंजीनियर बनाने की अभिभावकों की महत्वाकांक्षा का बोझ। पढ़ाई बोझ लगने लगी है। आईक्यू -90
उपाय सुझाये: अभिभावक अपनी महत्वाकांक्षा न लादें। पाल्य कुछ अच्छा करे तो प्रशंसा करें। कोर्स को टुकड़ों में बांटकर तैयारी कराएं।
       कार्यक्रम के अंत  में अचिन्त्य व क्यूट स्माइल ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार शेखर श्रीवास्तव ने कहा यदि आप नियमित रूप से मस्ती और आराम के लिए समय निकालते रहेंगे तो आप तनाव के कारणों से बखूबी निपट सकेंगे।सैर पर जाएं।प्रकृति के साथ वक्त बिताएं।किसी अच्छे दोस्त को कॉल करें।अच्छे व्यायाम के साथ तनाव से मुक्ति पाएं।अपनी विवरणिका में तनाव के बारे में दर्ज करें।लंबे समय तक स्नान करें।सुगंधित मोमबत्ती जलाएं। गर्मागर्म कॉफी या चाय पीएं।अपने पालतू जानवर के साथ खेलें।अपने बगीचे में बागवानी करें।मालिश कराएं।अच्छी पुस्तक पढ़ें।संगीत का आनंद लें।कॉमेडी फिल्म का मज़ा उठाएं।विश्राम करने का वक्त निकालें। अपने दैनिक कार्यक्रम में विरान तथा आराम करना शामिल करें। उस समय में दूसरा का न करें। यह ऐसा वक्त होगा जब आप हर चीज से मुक्त होकर अपने आप में नई ऊर्जा भरेंगे।दूसरों के साथ जुड़िए। सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों के साथ वक्त गुजारिए, जिससे आपको जीवन में नई ऊर्जा मिलेगी। तनाव के नकारात्मक प्रभावों से मुकाबला करने की आपमें मजबूती आएगी।हर दिन आनंद देने वाला कोई काम करें। हर दिन ऐसे क्रियाकलापों के लिए समय निकालें जिससे आपको आनंद मिलता है, जैसे तारों को देखना, पियानो बजाना अपनी बाइक चलाना।अपने हास्यबोध को बनाए रखें। इसमें अपने आप पर हंसना भी शामिल करें। हंसने से तनाव से मुक्ति मिलती है।उन्होंने महत्वपूर्ण टिप्स देकर कार्यक्रम का समापन किया।
- समय सारिणी बनाकर ही करें तैयारी।
- पढ़ाई के बीच बीच में करें मनोरंजन।
- मनोरंजनार्थ खेलें, टीवी देखें, टहलें।
- अभिभावक महत्वाकांक्षा न थोपें।
- पढ़ाई को बोझ नहीं, खेल की तरह लें।
- प्रतिस्पद्र्धा करें, किसी से तुलना नहीं।
- हल्का भोजन लें, नींद पूरी लें।

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