मानदेय न मिलने से आर्थिक तंगी के शिकार शिक्षामित्र
              विनय कुमार मिश्र
गोरखपुर। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किया जिससे प्रदेश के शिक्षामित्र आक्रोशित होकर आंदोलन की राह पकड़ी । जनपद से लेकर प्रदेश व देश की राजधानी दिल्ली तक शक्ति प्रदर्शन किए । इस बीच सरकार से कई दौर की वार्ता भी हुई और अंत में वर्ष के ग्यारह माह का मानदेय दस हज़ार रूपये मासिक तय किया गया जो छ माह बितने के बाद भी अभी तक नहीं मिला ।
    प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक की कमी को देखते हुए शिक्षामित्र की नियुक्ति 1999 से बीजेपी की ही सरकार में शुरू की गई जो 2250 रूपये से शुरू होकर 3500 रुपये मानदेय तक का सफ़र तय किया । इसमें दो तरह के शिक्षामित्र नियुक्त हुए । एक बेसिक शिक्षा परिषद और दूसरे सर्वशिक्षा अभियान से । अगस्त 2014 में सपा सरकार ने शिक्षक की सभी योगियता पूरा किए शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किए । प्रदेश के एक लाख सैंतिस हज़ार शिक्षामित्र विभिन्न चरणों में समायोजित किए गये । 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इनका समायोजन रद्द किया और प्रदेश के शिक्षामित्र आंदोलन की राह पकड़ते हुए जनपद से लेकर प्रदेश व देश की राजधानी दिल्ली तक सड़कों पर उतर आए । सरकार व संगठन के बीच कई दौर की वार्ता के बाद कोई रास्ता नहीं निकला और वर्ष के ग्यारह माह का मानदेय दस हज़ार रुपये के हिसाब से तय कर दिया गया जो बेसिक के शिक्षामित्रों को समायोजन रद्द होने के बाद से अभी तक मानदेय नहीं मिला । सर्व शिक्षा अभियान के शिक्षामित्रों का दो माह का मानदेय बक़ाया है । सातवें वेतन का बक़ाया एरियर भी बाकी है । इस बीच शिक्षामित्रों को घर से 70-80 किलोमीटर पढ़ाने जाना है । बीच बीच में कई त्योहार ,शादी ब्याह पड़ते रहे हैं ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है । शिक्षामित्रों के सामने एक नई समस्या लिखित परीक्षा भी आ गई है उसके तैयारी के लिए किताब ख़रीदना भी मुश्किल हो रहा है । इन्ही सब समस्याओं को देखते हुए प्रदेश के लगभग चार सौ से अधिक शिक्षामित्र असमय काल के गाल में समा गये हैं । ए खबरें लगातार हर तीन चार दिन के अंतराल पर सुनने को मिल रही है । इन सभी मामलों पर सरकार की उदासीनता शिक्षामित्रों की पीड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ा रही है । जो शिक्षामित्र वेतन उठाता था उसको दस हज़ार रुपये मानदेय के लाले पड़ रहे हैं । सरकार का शिक्षामित्रों के प्रति ऐसा सौतेला व्यवहार क्यूं ? अगर इसी तरह सरकार का रवैया रहा तो मजबूरन शिक्षामित्र संघ पुन: धरना प्रदर्शन को बाध्य होगा जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।ये बाते बेचन सिंह जिला मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ गोरखपुर ने एक प्रेस वार्ता में कही।

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