कुटुम्ब प्रबोधन के कार्यक्रम जुटे सैकड़ो परिवार

    सुल्तानपुर से अरुण साहू 
 परिवार नैसर्गिक वयवस्था है इसे रिस्तो के नाम को देखकर जाना जा सकता है। यह केवल भारतीय परम्परा है यूरोपियन व्यवस्था में मादरए फादर के आलावा सभी अंकल होते है। चाचाए मामाए नाना व बुआ की व्यवस्था नही है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रिय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य रामाशीष ने व्यक्त किया। 
     सुल्तानपुर नगर विवेकानंदनगर के सरस्वती शिशु मंदिर  के सभागार में आयोजित कुटुंब प्रबोधन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए रामाशीष ने कहा कि पुरुष स्त्री एक समान है का प्रचलन चल रहा है। जबकि यह गलत है। स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक है। आज प्राचीन टेस्टेड विचार को वर्तमान के बुद्धिमान प्राणी तोड़ने का प्रयास कर रहे है। 
     उन्होंने कहाकि परिवारए ग्रहस्ती त्यागमय जीवन है। जन्म तो जीन से आता है किन्तु दूध संस्कार से आता है। लोग बच्चों को जन्म तो देते है किन्तु पालन पोषण के लिए आया रखते है कभी कभी तो वही दूध भी पिलाती है।  आज का समाज जो प्राकृतिक हैए अच्छी व्यवस्थायेए सीख दी गयी है। उसके आदर्श ही है जिसकी वजह से हम आज तक खड़े है। 
      उन्होंने बताया कि अमेरिका में संस्कार और परिवार पर रिसर्च हुआए जिसमें एक बच्चे को एक कमरे में सीमित रखा गया। जिसे कुछ समय बाद निकाला गया तो देखने में आया कि वह संस्कार विहीन था।
      उन्होंने कहाकि दान देना मनुष्य की परम्परा का मुख्य अंग है। पहले जन्म दिवस पर दान देने की परम्परा थी किन्तु अब लेने की परम्परा बन गयी है। हमारे पुराने प्रमराये टेस्टेटद थे उसे निभाएए मिटाये नही लोग भारत की नकल कर रहे है अमेरिका में परिवार व्यवस्था को लागु करने की चुनाव में है। हम उनकी व्यवस्था को अपना रहे है। हम जिन संस्कारो को जानते है उसे मजबूती से लागु करे। ब्रह्म मुहूत में ही उठें।  घर की व्यवस्थाओ से तालमेल बैठाएं।
       उन्होंने बताया कि अमेरिका की एक खोज में कहा गया है कि टेलीविजन सप्ताह में चार घंटे चलनी चाहिए। यहॉ तो बमुश्किल उतने समय ही बंद रहती है। मंच पर संघ के विभाग संघचालक डॉ रमाशंकर मिश्रा एवं राजेंद्र कुमार लोहिया रहे। इससे पहले अतिथियों का परिचय कुटुंब प्रबोधन प्रमुख शिव नारायण तिवारी ने कराया। संपत अमरजीत वर्मा ने तथा संचालन शालिनी मिश्र ने किया। सरस्वती विद्या मंदिर के संगीताचार्य ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी के नेतृत्व में छात्र.छात्राओ ने भजनए राष्ट्रगीतए देशगान प्रस्तुत किया।
        कुटुंब प्रबोधन के दूसरे सत्र में नगर संघचालक अमर पाल सिंह की अध्यक्षता में 
सम्बोधन डॉण् जेण्पीण्सिंह ने कहाकि श्कुछ बात है कि मिटती नही हस्ती हमारीश्। यह वेद का देश है वेद का मतलब अमिट है। इस पर तमाम बार कुहासे आये और देश फिर उज्ज्वल हुआ। पिलर मात्र से भवन नही बनताए इसी तरह से परिवार में कोई व्यक्ति बहुत अच्छा हो सकता है किन्तु हर सदस्य को तालमेल रखना जरूरी है। भरत में अहम नही वयं भाव है। परिवार से संस्कार से  परिवर्तन आता है। विपरीत परिस्थितियाँ भी आनन्द में बदल जाती है। संघ विश्व का सबसे बड़ा परिवार है। आपके दायित्व का अनुकरण आने वाली पीढ़ी जरूर करें। यही कुटुंब प्रबोधन की सफलता है। 
हमारी गतिविधि राष्ट्रोन्मुखी होना चाहिए। यह तभी संभव है जब हम संस्कारी होगें।

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