आशा की किरण जगा रहे है ये गुरू

दिन के एक बजे है हमारी गाड़ी दरभंगा टाउन में एंटर कर चुकी है । मैं ने रिंग किया उधर से भारी आवाज़ आई हेल्लो , मैं बोला  काया मेरी बात आर ई.खान से हो रही है वे बोले हाँ। मैंने कहा मैं पत्रकार हु आप से मिलना। उन्होंने 5 बजे शाम में बुलाया , मिलने पंहुचा तो एक पुराना खंडहर सा कोचिंग , बहुत बड़ा क्लास रूम वो बोले बैठिये , और उन्होंने चाय ऑफर किया । उन्होंने कहा काया जान न चाहते है मैंने कहा आप का बहोत नाम सुना आप अपने बारे में कुछ बताये ।उन्होंने बोलना शुरू किया हम सुनते रहे। एक टीचर के साथ साथ अच्छे वक्ता भी ही। सीतामढ़ी डिस्ट्रिक के नानपुर थाना अंतर्गत गौरी गांव में पैदा हुए । नानी घर में । प्रारंभिक सिकचा रायपुर मिडिल एवं हाई सचिओल से ली फिर दरभंगा से 12thकरने के बाद  पशिचम बंगाल से इंजिनियरिंग  की डिग्री प्राप्त की। पहला जॉब श्याम स्टील एंड पावर दुर्गापुर फिर एस्सार पावर फिर गन्ना  उद्योग और अंत में मारुति कंपनी में काम का किया। लेकिन अपने इंजीनियरिंग के दौरान कोल्कता में फिजिक्स की क्लास अलग अलग कोचिंग में लेते थे। पता नहीं जॉब में मन नहीं लगा । शायद करियर का अगला पड़ाव मेरा इंतज़ार कर रहा था। भले ही जॉब कर रहा था लेकिन टीचिंग का जज्बा दिल से नहीं जा रहा था। सोचा दरभंगा वापसइंजीनियरिंग के दौरान कोल्कता में फिजिक्स की क्लास अलग अलग कोचिंग में लेते थे। पता नहीं जॉब में मन नहीं लगा । शायद करियर का अगला पड़ाव मेरा इंतज़ार कर रहा था। भले ही जॉब कर रहा था लेकिन टीचिंग का जज्बा दिल से नहीं जा रहा था। सोचा दरभंगा वापसअपनी मिटटी की खुश्बू ने मुझे दरभंगा आने पर मजबूर कर दिया। 2012 में दरभंगा में अकादमी ऑफ़ फिजिक्स नाम से 4 स्टूडेंट्स के साथ क्लास स्टार्ट किया आज लगभग 1400 स्टूडेंट्स का परिवार है। यहाँ से हर साल सैकड़ो स्टूडेंट्स आईआईटी और मेडिकल एग्जाम   क्रेक करते है। दरभंगा एक छोटा सा टाउन है जहाँ और भी डिस्ट्रिक के बचे पढ़ने आते है। उनकी उम्मीदों को पर लगबे का काम करता हु। सच बातो तो पढ़ने और पढ़ाने में काफी मज़ा आता है। फ्यूचर में कोटा सिस्टम कोचिंग ओपन करने की तैयारी है उम्मीद है 2020 तक खुल जायेगा दरभंगा में नार्थ बिहार का सबसे बड़ा शचिंग सिस्टम जहा 6th  से 12th  एवं मेडिकल एंड इंजीनियरिंग की तैयारी होगी वो भी बहोत काम फीस में। गरीबो को मुफ्त शिक्षा मिले यही कोशिश करता हु। वैसे तो समय नहीं मिलता । लेकिन फॅमिली के लिए भी थोड़ा समय चुरा लेता हूं। मेरी बिटीया रानी 1 साल की है उसे टाइम देता हूं ।सच कहूं तो बेटी किस्मत वालो को मिलती है। माँ के जाने के बाद पिता जी का भी ख्याल रखना पड़ता है। वो रिटायर्ड पुलिस सुब इंस्पेक्टर है। फ्री टाइम में सलाम एरिया में जाता हूं गरीब छात्रों को पढता हु उनके साथ कुछ पल बिता ता हु।

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