आज पटना महाराजा कम्प्लेक्स में केंद्रीय बजट पर जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित की गयी

पटना से अनूप नारायण सिंह 
प्रेस को संबोधन जाने माने अर्थशात्री प्रो. नवल किशोर चौधरी , सामाजिक कार्यकर्ता  डॉ अनिल कुमार रॉय , NAPM के राज्य संजोजक महेंद्र यादव, उदयन  बिहार के सन्दर्भ में  जो मुख्य बाते इस प्रकार रखीं

मोदी सरकार के अंतिम इस बजट में भी बिहार के साथ हकमारी हुई है 

बिहार के विकास के लिए बजट में किसी तरह के बढ़ोतरी नहीं दिखता है

सभी फसलों का लगत मूल्य से डेढ़ गुना ज्यादा देने का वादा भरतीय जनता पार्टी का था लेकिंन मोदी सरकार 4 साल पुरे होने के बाद भी फसलों का MSP में मामूली बढ़ोतरी हुई है वित्त मंत्री का कहना था की रवि के फसलों का MSP में 50% की बढ़ोतरी दी गयी है यह एक झूठ है कृषि मंत्री जो बिहार के हैं उन्हें बताना चाहिए कि किन किन किसनों को यह लाभ मिला है.

बिहार के साथ हर साल बजट की कटौती की जा रही है इसका प्रमाण यह है कि

वित्त मंत्री का कहना था की रवि के फसलों का MSP में 50% की बढ़ोतरी दी गयी है यह एक झूठ है कृषि मंत्री जो बिहार के हैं उन्हें बताना चाहिए कि किन किन किसनों को यह लाभ मिला है.

परंपरागत कृषि विकास योजना में बिहार के बजट में लगातार कटौती की गयी है

PKVY के तहत किसान समूह को 3 वर्ष के लिए जैविक आदानो का प्रमाणन ग्रेडिंग, पैकिंक और विपणन के लिए 50000 रूपये प्रति किसान समूह/ कलस्टर प्रति हेक्टेयर दी जाती है.

भारत के कृषि मन्त्री बिहार राज्य से रहते हुए बिहार में किसान समूह / कलस्टर के लिए विगत 4 वर्षों मे कुछ भी नहीं कर पाए. एक तरफ जहाँ PKVY में 2015- 161400.49 से 2017-18 आते आते बिहार का बजट आवंटन 573.86 किया जो कि 826.63 लाख कम है. हर बार कि तरह इस बार के बजट से निर्मुक्ति में भी भरी मात्र में रुपये की कटौती की.

दुःख कि बात है कि बिहार सुशासन बाबु की सरकार बजट आवंटन होने के बाद अपना हिस्सा केंद्र से लेने में नाकाम रही साथ ही निर्गत किये रूपये को खर्च भी नहीं कर पायी

फसल बीमा योजना भी बिहार में फेल है बिहार 2016-17 रवि और खरीफ के मौसम में गैर ऋणी 22 हज़ार किसानों ने बीमा कराया और क्लेम किन किसानों को दिया है सरकार के पास इसका कोई अकड़ा नहीं है.

सर्व शिक्षा अभियान में मोदी सरकार ने 2014 से 2017-2018 तक 12541 करोड़ रुपया की कटौती की है. विकास के डबल इंजन से बिहार को विकसित करने का नीतीश मोदी सरकार कर रही थी उसका बजट में इस विकास के डबल इंजन का तेल ही नहीं मिला है. सरकार बिहार की शिक्षा व्यवस्था चौपट करने तुली है.

सरकार ने रोजगार सृजन की कोई बात नहीं की है . जितने भी विभाग हैं उनमे बजट की बहुत मामूली वृद्धि की है . जबकि सरकार ने अपने कर्मचारियों को सातवाँ वेतन आयोग के तहत वेतन वृद्धि की है. और महंगाई भी बढ़ी है इस सब बातों को देखते हुए बजट आवंटन में वृद्धि नहीं की गयी है

मनरेगा, स्वस्थ, शिक्षा, सभी के बजट के डायरेक्ट एक्सपेंस को हटा लें तो एक्चुवल बजट कम ही आवंटित किया गया है.

प्रेस को संबोधित करते हुए साथ मेे मणिलाल  और दीपक  भाग लिया

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