बच्चा राय ने बिहार बोर्ड के अधिकारियों से साठगांठ कर ली थी। वह पैसे लेकर अपने कॉलेज के छात्रों को अधिक अंक दिलाता था। 

पटना. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को टॉपर घोटाला के मास्टरमाइंड अमित कुमार उर्फ बच्चा राय की 4.53 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के केस में की है। ईडी ने 4 बार बच्चा राय की पत्नी और अन्य परिजन को समन देकर पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन कोई पेश नहीं हुआ। इसके बाद ईडी को बच्चा राय की संपत्ति जब्त करनी पड़ी।

1) फरार है बच्चा राय की पत्नी
- टॉपर घोटाले का मुख्य आरोपी बच्चा राय जेल में है। बच्चा की गिरफ्तारी के बाद से उसकी पत्नी और अन्य परिजन वैशाली जिले के लालगंज स्थित घर को छोड़कर फरार हैं। 
- पूछताछ के लिए ईडी की टीम ने गांव में बच्चा राय के घर पर नोटिस चिपकाया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। बच्चा राय ने अवैध तरीके से हुई अकूत कमाई को जमीन खरीदने में लगाया। इसके अलावा भी जांच एजेंसी कई जगहों पर निवेश के सबूत मिले हैं।

2) क्या है टॉपर घोटाला?

- बच्चा राय वैशाली जिले के लालगंज में स्थित वी आर कॉलेज चलाता था। वह अपने कॉलेज के छात्रों से अच्छे अंक दिलाने के बदले मोटी रकम वसूलता था।

- बच्चा ने बिहार बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद से गठजोड़ कर रखा था। वह बोर्ड अध्यक्ष के साथ मिलकर अपने कॉलेज के छात्रों को मनमाने मार्क्स दिलाता था। वह छात्रों की कॉपी बदलवा देता था और उसकी अलग से मार्किंग कराता था।

3) कैसे सामने आया?

- मई 2016 में जब इंटर आर्ट्स का रिजल्ट आया तो वैशाली जिले के वी आर कॉलेज के कई छात्र टॉपर लिस्ट में आए। इसी कॉलेज की रूबी राय 444 अंक लाकर टॉपर बनी थी।

- मीडिया से बातचीत में उसने पॉलिटिकल साइंस को प्रोडिकल साइंस बताया था। इससे पता चला कि जिस छात्रा को सब्जेक्ट के बार में पता तक नहीं था, वह टॉपर बन गई।

4) अब तक क्या हुई कार्रवाई?

- टॉपर घोटाला सामने आने के बाद बच्चा राय, बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद, उनकी पत्नी उषा सिन्हा समेत कई लोगों को जेल में डाल दिया गया।

- 14 फरवरी 2017 को पटना हाईकोर्ट से बच्चा राय को जमानत मिली थी। इसके बाद बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा राय की जमानत रद्द कर दी थी।

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