विविधताओं से भरी प्रकृति और इस पर उगे वनस्पतियों में गूढ़ रहस्य छिपे हैं
बिहार व्यूरो ,अनूप नारायण सिंह की खास रिपोर्ट :


 इन्हीं वनस्पतियों में हर मर्ज की दवा मौजूद है। जागरूकता के अभाव में लोग वनस्पतियों की उपेक्षा कर रहे हैं। नतीजा है कि पर्यावरण के साथ-साथ उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। वनस्पतियों के महत्व,पर्यावरण संरक्षण व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान को ले निदान बायोटेक ने एक अनूठी पहल की है।  सिंहेश्वर में लगे निदान बायोटेक के स्टाल पर भीड़ उमड़ रही है और लोग वनस्पतियों के गूढ़ रहस्य की जानकारी के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं। निदान बायोटेक के प्रोपराइटर डा.आरके सिंह बाडी एनलाइजर मशीन से कुछ ही मिनटों में पूरे शरीर का स्केन कर लोगों को 36 प्रकार के जांच का रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान का उपाय भी बता रहे हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, शारीरिक दर्द, सूजन, हाथ में कंपन, कोलेस्ट्राल, थायराइड आदि से संबंधित रोगियों की भीड़ निदान बायोटेक के स्टाल पर उमड़ रही है और लोग इस प्रयास को सराह रहे हैं। मेले में पहली बार निदान बायोटेक के स्टाल पर साइरन ताला, बिजली बिल बचत यंत्र, मार्निग वार्कर, पाकेट वाटर प्यूरीफायर आदि यंत्र प्रदर्शनी में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त आस्ट्रेलियन टीक, वर्मा टीक, मलेशियन साल, क्रास महोगनी, बांस, आम, लीची, कटहल, अमरूद, अनार, बैर, केला, आंवला आदि के कई किस्म के साथ-साथ किचेन गार्डेन आइटम, तरह-तरह के फूल व विभिन्न प्रकार के सब्जियों के बीज उपलब्ध हैं।
सिंहेश्वर गांधी पार्क स्थित निदान बायोटेक नर्सरी से अब विशालकाय बांस और न्यू टीक के पौधे इंदौर जैसी नगरी में लगाए जाने के लिए भी जाने लगी है। आईएसओ मार्का वाले कोसी क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित पौधशाला में बीज से बांस के पौधे विकसित किए गए हैं। यह बांस अधिक मोटा, ठोस और लंबा होता है। इसे विशाल बांस का नाम दिया गया है। इसी प्रकार न्यू टीक के पौधे भी विकसित किए गए हैं। जिले में बांस की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए पांच हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान की भी योजना है। लेकिन यहां के सरकारी पदाधिकारी कंद वाले बांस असम आदि राज्यों से लाकर लगवाते हैं, जो सूख जाता है। अगर किसान इसके बदले विशाल बांस लगावें तो उन्हें भारी मुनाफा होगा। निदान बायोटेक के संस्थापक डा.आरके सिंह एवं एसके सिंह बताते हैं कि इंदौर के एक संतरा उत्पादक किसान ने हमारे उत्पाद को इंटरनेट पर देखकर हमें एक हजार पौधों का आदेश दिया है जिसे यहां से पटना और फिर इंदौर भेजा जा रहा है। ज्ञातव्य है कि निदान बायोटेक का इस क्षेत्र में वृक्षारोपण के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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