विनय कुमार मिश्र
गोरखपुर। भारत सेवाश्रम संघ के तत्वावधान में आयोजित 11 वां वार्षिक महोत्सव एवं श्री श्री वासंती दुर्गा पूजा के अवसर पर  आश्रम परिसर कैंट थाने के पीछे देवी प्रतिमा की स्थापना हुआ है।इस अवसर पर कार्यक्रम में विशेष योगदान देने वाले मुख्य अतिथि पूर्वांचल के वरिष्ठतम होम्योपैथ चिकित्सक यश भारती एवं पूर्वांचल गौरव से सम्मानित डॉ रामरतन बनर्जी ने कहा कि सेवा मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है जो अन्य प्राणियों से श्रेष्ठतम बनाता है। सेवा मानवता की अद्भुत जीवन रेखा है। सेवाधर्म परम गहन होने से योगियों के लिए अगम है विवेक, बुद्धि, काल और समय का विचार करके सेवाधर्म का निर्वहन होता है। सेवा के समान कोई तप और यज्ञ नहीं है।गोस्वामी तुलसी दास जी कहते हैं कि 'आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।' भारतीय चिंतन में सेवा जीवन शैली का एक विशिष्ट अंग है। सामाजिक सेवा कीर्ति बढ़ाती है। सेवा परमात्म तत्व, वरदान, यज्ञ, तप और त्याग है। सेवा से परमतत्व सिद्ध होती है। सेवा का वास तप के मूल में है, अत: यह वरदान है। सेवाधर्म में स्वार्थ ईष्र्या के कारण विरोध आता है। सेवा का भाव परिवार और मां की गोद से उपजता है। यह सबसे बड़ा संस्कार होता है। सेवा करने की तत्परता महानता का लक्षण है दूसरों के लिए नि:स्वार्थ भाव से किया गया कार्य सेवा है। सेवा का अर्थ है देने के अलावा न लेने का संकल्प। व्रत सदाचरण का प्रतीक है। इसकाका श्रेष्ठतम रूप माता-पिता, आचार्य और अतिथि की सेवा करना देवपूजा है। सेवा का संस्कार महान बनाता है। सेवाव्रती तेजस्वी, कर्मनिष्ठ, उन्नत एवं विलक्षण करते हैं। निष्काम सेवा जीवन को चमकाती है। मानवता की सेवा ईश्वर की पूजा है।इस अवसर पर वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सिका डॉ रचना ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि त्याग और सेवा भारत के दो आदर्श हैं। इन दिशाओं में उसकी गति को तीव्र कीजिए शेष अपने आप ठीक हो जायेगा। वही जीवित हैं, जो दूसरों की सेवा के लिए जीते हैं। समाज सेवा विराट की सेवा है। सेवाधर्म की पावन मंदाकिनी सबका मंगल करती है। यह लोक साधना का सहज संचरण है। माता-पिता की शुश्रुषा से बढ़कर कोई तप नहीं है। सेवा मानवीय गुण है निष्काम सेवा का फल आनंद है।
     23 मार्च से 25 मार्च तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन प्रातः पूजन पुष्पांजलि आरती भजन कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन आश्रम प्रांगण में किया गया। इस अवसर पर  आनंदो मुखर्जी,डॉ अमरनाथ चटर्जी , मीता चटर्जी , डॉ प्रशांत चटर्जी , सुभाष दत्ता , पार्थो चटर्जी , गोपाल महाराज दीपक चक्रवर्ती श्रीमती प्रीति चटर्जी , पूर्व महापौर सत्या पांडेय,अमित शर्मा , गणेश थापा , उमेश पाठक विश्वनाथ भट्टाचार्य , जगदीश  , रामचंद्र सिंह कुरुक्षेत्र से पधारे स्वामी तारा नंद जी , महाराज वीरेंद्र पाल , रामपति आदि उपस्थित रहे।

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