कानपुर देहात से सौरभ मिश्रा की रिपोर्ट
कानपुर देहात - गौरतलब है कि औधोगिक क्षेत्र रनियां को औधोगिक क्षेत्र की  राजधानी रुतवा कैंप मे गणना की जाती है परन्तु न यहां चलने लायक सड़कें हैं और न ही
उधमियों को जल निकासी की कोई भी समुचित व्यवस्थाएं है।कहनें को तो यहाँ लाखों की लागत से ड्रेन का निर्माण होना सुनिश्चित था किन्तु सरकारी अमला के उपेक्षाओं के चलते ड्रेन का निर्माण न हो सका ।वहीं आज रनियां क्षेत्र बासिन्दें कहनें को औधोगिक क्षेत्र की राजधानी में रहते हैं।
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> परन्तु राजनैतिक नदर अंदाज़ होनें के कारण गांव की ग्रामसभा ही बनी रही ।
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> वहीं लोगों की माने तो रनियां सहित तकरीबन एक दर्जन गांव के लोग चलने वाले कलकारखानों में रोजगार की मनसा लिए रह जाता है।जब कि ततकालीन सरकार के मुखिया पं०नारायण दत्त तिवारी द्वारा जहाँ कानपुर देहात के नाम से नये जनपद की घोषणा की गयी थी ।वहीं रनियां व जैनपुर को औधोगिग क्षेत्र घोषित किया था ।और दूसरे प्रान्त के उधमियों को विशेष प्रकार की रियायत देकर कार इस लिए स्थापित कराये थे जिससे यहाँ रनियां क्षेत्र के वेरोजगारों कै रोजगार आसानी से मिल सके ।लेकिन ढाक के दोपत्ते ही रहे।
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> फैक्टरियों के प्रवन्धतंत्र उन्हें लोकल का बताकर उन्हें फैक्ट्री से बैंरंग वापस कर देते हैं ।जबकि प्रत्येक माह मे होने वाली उधोग बन्धुओं की बैठक मे जिलाधिकारी कान पुर देहात से प्रत्येक उधमी यही कहता है कि मै लोकल का ३०%प्रतिशत आदमियों को अपने कारखानों मे रोजगार देतें है ।लेकिन आज आलमये है कि कुन्दनपुर “किशरवल रनियां खानचन्द्रपुर चिराना कटका फत्तेपुर रोशनाई प्रसिद्धिपुर नारीखेत पतारी स्योंदा उमरन रहीमपुर विषायकपुर तरौंदा कीरतपुर रायपुर आदि दर्जनों गांव वेरोजगारी मार से गुजर रहें हैं ।
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> इतना ही नही बल्कि दर्जनों गांवों फैकट्रियों के प्रदूषित पानी से परेशान हैं जो कि अनेक संक्रमण रोगों के शिकार हो रहे हैं। जो कि यहाँ ताकरीबन ४०फिट तक के बोरिंग वाले नल आज भी प्रदूषण युक्त. रंगीन पानी उगल रहे   हैं। वहीं बाहर से आने वाले राहगीरो का यह कहना है कि अब रनियां आ गया है, पूछने पर वह बतातें हैं कि आंखो मे जब राखी चली जाए तो समझो कि रनियां आ गया है। प्रदूषण बोर्ड अधिकारी का कहना है कि राखी प्रदूषण नियन्त्रण के अन्तर्गत नही आता है। जिससे उधमी खुले आम कथित ठेकेदारों द्वारा राखी को खुलेआम कहीं भी फिकवा देतें हैं यही आलम बना रहा तो यहां निवास करने वाले बासिन्दे बीमारी से ग्रषित होगें। अब रनियां सहित क्षेत्र के बसिन्दो ने आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है।

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