मायावती: जरुरत पड़ी तो राज्यसभा चुनाव में भी सपा का होगा साथ
          विनय कुमार मिश्र
उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सभी पार्टियों में हलचल मच गई गई है.  इसी कर्म में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में उपचुनाव को लेकर समर्थन को लेकर चर्चाएँ शुरू हो गयीं हैं. बता दें कि लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी आज एक दूसरे से हाथ मिला लिया हैं. वहीँ अब इस गठबंधन को लेकर बसपा सुप्रीमों मायावती ने ये बड़ा बयान दिया है.
कहा- चुनावी गठबंधन खुलकर होगा:

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि,  ‘कर्नाटक के अलावा कही गठबंधन नहीं किया’. वहीँ सपा से गठबंधन की खबर पर उन्होंने कहा कि गठबंधन गुपचुप तरीके से नहीं होगा, चुनावी गठबंधन खुलकर होगा.वहीँ आगे उन्होंने कहा कि 2019 में बीएसपी का ये गठबंधन बीजेपी को हराना मुख्य मकसद है और बीजेपी को हराने के लिए सपा का सपोर्ट जरूरी है. उन्होंने कहा कि ‘जरुरत पड़ी तो राज्यसभा चुनाव में भी सपा का साथ होगा’. उन्होंने कहा कि  राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारेगी बीएसपी.
उन्होंने कहा कि ‘MLC सपा का होगा और राज्यसभा सदस्य हमारा’. वहीँ अगर MP में कांग्रेस को सपोर्ट चाहिए, तो वह UP में मदद करें. उन्होंव कहा कि राज्यसभा प्रत्याशी बीएसपी से होगा और विधान परिषद का प्रत्याशी सपा से.
सपा-बीएसपी ने गठबंधन की करी घोषणा:
उत्तर-पूर्व में भगवा बयार के बीच यूपी में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं. बसपा गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशियों का समर्थन करेगी।रविवार को गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव को लेकर सपा-बीएसपी ने गठबंधन की घोषणा की है. बता दें कि दोनों पार्टी के बड़े नेताओं ने ये घोषणा की है. हाथ उठाकर सपा प्रत्याशी के समर्थन का एलान किया गया है. इस दौरान सपा एमएलसी उदयवीर सिंह साथ में मौजूद रहे.वहीँ साथ ही बीएसपी के जोनल स्तर के नेता भी वहीँ मौजूद थे. गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा के प्रत्याशी को बीएसपी का समर्थन.
सपा-बसपा एक-दूसरे के साथ रहेगी:

उत्तर प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस के साथ मोहभंग होने पर अब समाजवादी पार्टी को अपने धुर विरोधी बहुजन समाज पार्टी के साथ हाथ मिलाना पड़ा रहा है। माना जा रहा है कि गोरखपुर तथा इलाहाबाद के फूलपुर लोकसभा उप चुनाव में यह दोनों धुर विरोधी मिलकर भारतीय जनता पार्टी को पटखनी देने के जतन में लगे हैं।
उपचुनाव से दूर रहने वाली बसपा फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में सपा का समर्थन करेगी। पार्टी ने अब तक इसकी अधिकृत तौर पर घोषणा तो नहीं की है लेकिन, पदाधिकारियों को इस बारे में बता दिया गया है। समर्थन के बेहतर नतीजे निकले तो राज्यसभा और विधान परिषद सदस्यों के चुनाव में भी सपा-बसपा एक-दूसरे के साथ रहेगी। इतना ही नहीं सब कुछ ठीक रहा तो अगले वर्ष होने वाले लोकसभा के आम चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव भी लड़ सकती हैं।बसपा का एक बड़ा तबका 2019 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के लिए पैरवी कर रहा है। शनिवार को त्रिपुरा में वाम किला ढहने की सूचना के बाद अचानक बसपा के समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि बसपा के जिम्मेदार नेताओं ने इस तरह की किसी सूचना से इन्कार किया है।
मायावती ने पार्टी के नेताओं से फीडबैक ली

दरअसल, 2012 में सूबे की सत्ता गंवाने के बाद लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बावजूद बसपा प्रमुख मायावती चुनावी गठबंधन से अब तक इंकार ही करती रही हैं लेकिन भाजपा का बढ़ता ग्र्राफ कहीं न कहीं उन्हें परेशान करने वाला है। ऐसे में भाजपा को रोकने और अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए बसपा प्रमुख अपनी रणनीति को बदलते हुए नए सिरे से चुनावी गठबंधन की संभावनाओं को देख रही हैं। गोरखपुर और फूलपुर में हो रहे लोकसभा उपचुनाव के बारे में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के नेताओं से फीडबैक लिया था। दोनों लोकसभा क्षेत्रों के जोनल कोऑर्डिनेटर से भी उनकी बात हुई थी।
बताया जा रहा है कि गोरखपुर और फूलपुर में हो रहे लोकसभा उपचुनाव के बारे में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के जिम्मेदार नेताओं से फीडबैक लिया था। दोनों लोकसभा क्षेत्रों के जोनल कोऑर्डिनेटर से भी उनकी बात हुई थी। शनिवार को अचानक बसपा के सपा को समर्थन की चर्चाएं तैरने लगीं, क्योंकि बसपा के कई नेता भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के पक्ष में थे।यहां तक कि सपा और बसपा के जिम्मेदार नेताओं की पर्दे के पीछे इस बारे में कई बार बातचीत भी हो चुकी थी। बसपा सुप्रीमो मायावती की सहमति मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जोनल कोऑर्डिनेटर व स्थानीय नेता एक-दो दिन में सपा प्रत्याशियों के समर्थन का एलान कर सकते हैं।

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