कानपुर देहात से सौरभ मिश्रा की रिपोर्ट
> रूरा कानपुर देहात ।                                      भारत भूमि वीरों की कर्म स्थली रही है  हमारे पुरखे भरत शेरनी  के सामने उसके शावकों के मुंह में  हाथ डालकर दांत गिनते थे  ऐसा वीरतापूर्ण गौरवशाली इतिहास भारत के अलावा किसी भी देश में नहीं सुनाई देता 23 मार्च 1931 को सायं 7:00 बजे लाहौर जेल में महान क्रान्तिकारी राजगुरु सुखदेव भगत सिंह को वायसराय से माफ़ी  मांगने  से इंकार कर देने पर फांसी की सजा सुनाई गई थी ।उक्त बात पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिठमरा में शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने कही।
> प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह 28 सितंबर 1960 को लायलपुर के बंगा गांव में किशन सिंह के घर जन्मे थे और बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय असेंबली में दो बम फेंके थे
> एनपीआरसी समन्वयक नवीन कुमार दीक्षित ने कहा कि राजगुरु हरि बनारस में जन्मे थे उनको लाहौर केस में मुख्य अभियुक्त मानकर 30 सितंबर 1929 को पूना में गिरफ्तार किया गया था पर्यावरण प्रेमी शिवम् ने कहा कि महान क्रांतिकारी सुखदेव जी 15 मई 1960 को लुधियाना में रामलाल व रल्ली देई के घर जन्मे थे।,वे अपने साथियों की बहुत मदद करते थे उन्होंने गांधी इरविन पैक्ट का विरोध करते हुए महात्मा गांधी को एक पत्र भी लिखा था  मीनाक्षी प्रियंका दिव्या सनी सीमा निशा आरती मयंक हिमांशु तथा अनुदेशक रानी प्रियंका शिक्षक सरलादेवी एवं कैलाश तिवारी उमा देवी आदि सभी ने महान क्रांतिकारी शहीद ए आजम भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण  किया।।

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