शिवसेना समाजवादी की ओर से देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को देश की खातिर निछावर कर  देने वाले अमर शहीद भगत सिंह अमर शहीद सुखदेव अमर शहीद राजगुरु के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई यह बलिदान दिवस कार्यक्रम वार्ड नंबर 16 में हुआ की अध्यक्षता जिला प्रधान महिला विंग कायरा गिल की अध्यक्षता में हुआ इस श्रद्धांजलि समारोह में विशेष रूप से उपस्थित हुए मैडम पुष्पा गिल उत्तर भारत सचिव एवं हिमाचल प्रदेश प्रभारी शेर सिंह सीनियर नेता शिवसेना समाजवादी बरखा गिल सीनियर नेता शिवसेना समाजवादी श्रद्धांजलि समारोह में विशेष तौर पर उपस्थित हुए लखनऊ का मैडम पुष्पा गिल शेर सिंह कायरा गिल बरखा गिल ने संयुक्त रुप में अमर शहीद वीरों के बारे में बताया जिन्होंने छोटी सी आयु में देश की आजादी के लिए अपनी जान देश के नाम कर दी 23 मार्च  1931  को इन वीरों को फांसी दी गई अमर शहीद राजगुरु अमर शहीद भगत सिंह अमर शहीद सुखदेव  तीनो ही बहुत देशभक्त थे भारत की आजादी के लिए काम करते थे अमर शहीद राजगुरु का असली नाम शिवराम हरि था जिनका जन्म 24 अगस्त 1908 को पुणे के  खेड़ा गांव में हुआ था इनके पिता का नाम हरिनारायण  माता का नाम पार्वती भाई था केवल 3 वर्ष की आयु में उनके पिता की मृत्यु हो गई अमर शहीद भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को पंजाब के जिला  लालपुरा गांव बंगा में हुआ वह एक देशभक्त परिवार में हुआ इनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम व  विद्यावती कौर था 14 वर्ष की आयु में ही देश की आजादी के लिए  पंजाब क्रांतिकारी संस्था में कार्य करने लगे थे 1923 में जब उनका विवाह करने की तैयारी करने लगे तब वह भागकर लाहौर से कानपुर आ गए अमर शहीद सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना चौड़ा बाजार में  हुआ  इनके पिता का नाम राम लाल थापर था माता रली देवी शिक्षा नेशनल कॉलेज लाहौर में पुरी के दुर्भाग्य से जब सुखदेव 3 वर्ष के थे तभी उनके पिता  जी का देहांत हो गया उनका पालन पोषण उनके ताऊ लाला अंचित राम ने किया यह तीनों वीर योद्धा भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार से भारत को मुक्त कराने के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते रहे यह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और  पंजाबी क्रांतिकारी संगठनों में शामिल रहे राजगुरु ने 19 दिसंबर 1928 को शहीद ए आजम भगत सिंह के साथ मिलकर लाहौर के सहायक पुलिस अध्यक्ष के पद पर नियुक्त अंग्रेज अधिकारी जे. पी. सांडस को गोली मार दी थी और इन्होंने 28 सितंबर 1929 को एक गवर्नर को मारने की कोशिश की थी अदालत में  बयान में इन क्रांतिकारियों ने स्वीकार किया था कि देश की आजादी के लिए पंजाब के एक बड़े नेता लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेना चाहते थे पुलिस की बब्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी आज जो हम आजादी का सूरज देख रहे हैं वह सब इन शहीदों की बदौलत है जिन्होंने छोटी सी आयु में अपनी जान देश के नाम कर दी और देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई हमें गर्व है इन वीरों पर और हम सब को उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें करना चाहिए और देश विरोधी ताकतों का डटकर विरोध करना चाहिए यही एक सच्चे हिंदुस्तानी का फर्ज है इस बलिदान दिवस में वार्ड नंबर 16 प्रधान आशा रानी सिटी vice प्रधान यूथ रजत नायर आरती सहोता क्षमा  मेहनाज रिंकू जिंदा और भी काफी शिवसैनिक शामिल हुए

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