इस बार के उपचुनाव में राज्य के बाहर सैन्य सहित केंद्रीय सेवाओं में नौकरी कर रहे वोटरों को पहली बार इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट पेपर्स (ईटीपीबीएस) के जरिये मतदान की सुविधा मिलेगी. केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने पोस्टल बैलेट के पुराने तरीके में बदलाव करते हुए अब इसे इंटरनेट के जरिये सर्विस वोटरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की है. सर्विस वोटर्स इस पर अपना मत अंकित करने के बाद पहले की तरह वापस डाक से भेजेंगे. डाक व्यवस्था का खर्च मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के स्तर पर वहन किया जायेगा. सर्विस वोटरों के लिए मतदान की नयी प्रक्रिया अररिया लोकसभा व जहानाबाद-भभुआ विधानसभा उप चुनाव के साथ ही बिहार में  लागू हो जायेगी. इसको लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखा है.
 
डाउनलोड कर सकेंगे मत पत्र 

आयोग के निर्देशों के मुताबिक इस बार सर्विस वोटरों को पोस्टल बैलेट पेपर के साथ ही चार तरह के प्रपत्र डाक की बजाय इलेक्ट्रॉनिक-मेल (ई-मेल) माध्यम से भेजे जा रहे हैं. मतदाताओं के पास इलेक्ट्रॉनिक पोस्टल बैलेट मेल के जरिये पहुंचेगा, लेकिन उन्हें इसे स्पीड पोस्ट या रजिस्ट्री के जरिये उसे वापस करना होगा. इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट जो कि डाउनलोडेबल है, उसे काफी सुरक्षित रखा गया है. इसके लिए टू-लेयर सिक्यूरिटी तय की गयी है. पहले इसे डाउनलोड करने के लिए ओटीपी की जरूरत पड़ेगी. वहीं इसे प्रिंट करने के लिए पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (पिन) की जरूरत पड़ेगी जो कि सर्विस वोटर को उनके मोबाइल या ई-मेल पर मिलेगा.
 
मतपत्रों की होगी क्यूआर स्कैनिंग 
 
पोस्टल बैलेट के जरिये प्राप्त होने वाले मतों की गिनती क्यूआर स्कैनिंग के जरिये होगी. मतपत्रों की किसी भी तरह की नकल रोकने को लेकर सॉफ्टवेयर आधारित वेरिफिकेशन की व्यवस्था की गयी है. प्राप्त होने वाले पोस्टल बैलेट में घोषणा पत्र (13A) नहीं पाये जाने, इश्यू किये गये इलेक्ट्रॉनिक पोस्टल बैलेट आइडी का प्राप्त बैलेट आइडी से मिलान नहीं होने तथा मतदाता का हस्ताक्षर नहीं होने की स्थिति में निर्वाची पदाधिकारी को मत रद्द करने का अधिकार भी दिया गया है. 
 
82 हजार से अधिक सर्विस वोटर 
 
बिहार में सर्विस वोटरों की संख्या 82 हजार से अधिक है. अररिया लोकसभा क्षेत्र में 466 जबकि कैमूर व जहानाबाद क्षेत्र में इनकी संख्या क्रमश: 415 और 848 है.

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