मनीषा के जज्बे को सलाम

पटना से अनूप नारायण सिंह
मनीषा कुमारी के दादा  जी का नाम राम चंद्र प्रसाद सिंह है
स्कूल नाम - मॉडल स्कूल डालमियानगर रोहतास 
पता - डी टाइप 69 , नियर चावल मार्किट 
     कंसिच्यूशनल क्लब में स्काऊट्स गाइडस के वार्षिक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री अश्वनी चौबे , एकाउंट्स गाइड के नेशनल कमिश्नर राज के पी सिन्हा साथ कई नामी हस्तियाँ ... शोभना भारती सहित काफ़ी संख्या में लोग उपस्थित थे । विभिन क्षेत्र के लोगों को सम्मानित किया गया ..। मनीषा कुमारी को सामाजिक क्षेत्र के साथ ग़रीब बच्चों में शिक्षा की अलख जागने और प्रेरित करने के लिए एनिवेसेंट नेशनल सम्मान से केंद्रीय मंत्री ने सम्मानित किया । क्षत्रिय कुल में जन्म लेना और उस वंश का होना गौरव की बात है । 
    वर्तमान में मनीषा कुमारी बिहार लोकसेवा आयोग के प्रारम्भिक परीक्षा में उतरींण कर मुख्य परीक्षा की तैयारी में लगी है । इनके दादा सेना में थे ..। उनका सपना था की उनकी पोती IAS / IPS बने ..।.मनीषा कुमारी अपने दादा के आकांक्षाओं - उम्मीद पर खरे उतरने के लिए संकल्प के साथ दिन - रात पढ़ाई में लगी रहती है । प्रतिदिन लगभग 12-14 घंटा पढ़ाईं पर समय देती रहती है । ईश्वर के प्रति एवं पूजापाठ में ख़ासी रुचि रखती है । 
         पढ़ाई से वक़्त मिलने पर समाज सेवा में लगी रहती है । ग़रीब बस्ती के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करती रहती है और कई  ज्ञान की बातें जानकारी बच्चों को देती रहती है । इनका कहना है कि शिक्षा - ज्ञान आज इंसान के लिए वो संपती है जो इंसान को कभी भी भूख से मरने नही देगा । समाज से अपील करती है की अपने बच्चों को शिक्षा के लिए ध्यान दे । किसी के चेहरे की मुस्कराहट की वजह तो बनो,
  ख़ुशी ही नही सुकून भी मिलेगा  । राष्ट्र के विकास का मूलमंत्र शिक्षा है ।
     मनीषा का दिल से संदेश:-
    जिन्दगी का बहुत बडा रहस्य ये है की हम जानते है की समाज हमारे कार्य से अनभिज्ञ है 
        परंतु ए सत्य नही है 
समाज की लाखों - लाख आँखें और कानो से बचना कठिन है 
         इस लिए सत्य - निष्ठा के साथ , आचरण - चरित्र के साथ संकल्पित भाव से सकारात्मक कार्य करते रहे क्योंकि अच्छे कार्य को समाज देर से ही सही स्वीकारते हुवे मान्यता देती है :- 
             यक़ीन करना सीखें
                शक तो सारी दुनिया​
                       करती है
                     ​माना कि आप​
                ​किसी का भाग्य नहीं​
                      ​बदल सकते​
                 ​लेकिन अच्छी प्रेरणा​
                  ​देकर किसी का मार्ग​
                  ​दर्शन तो कर सकते हैं​
  बिना फल वाले सूखे पेड़ पर कभी कोई पत्थर नहीं फैंकता। पत्थर तो लोग उसी पेड़ पर मारते हैं जो फलों से लदा होता है​
शख़्सियत अच्छी होगी तभी लोग उस में बुराइयाँ खोजेंगे वरना बुरे की तरफ़ देखता ही कौन है

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