चेहरे पर मुस्कान बांट रही है शगुन कृष्णा

बिहार ब्यूरो ,अनूप नारायण सिंह

बिहार और नेपाल के तराई के बस निर्मली की सगुण कृष्णा की कहानी बाधाओं पर विजय की कहानी एक साधारण किसान परिवार में जन्मे शगुन कृष्णा के पिता खेती-बारी कर अपने 6 बच्चों तीन बेटे और तीन बेटियों की पढ़ाई पर प्रारंभ से ही ध्यान दिया शगुन बताती हैं की उनके पिता ने जब उन्हें पढ़ने के लिए बोर्डिंग स्कूल में भेजा उसी समय से उनके दिमाग में यह बात आई कि वह अपने पिता के कष्टों को उनके बलिदान को एक मुकाम देकर रहेगी पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के पश्चात शगुन आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली गई वहां जाने के बाद की जो अपने अंदर की कलात्मकता है उसे किसी अन्य क्षेत्र में जीवंत किया जाए दिल्ली में उन्होंने शहनाज ब्यूटी क्लिनिक से ब्यूटीशियन का कोर्स किया 1989 में यह दवा कारोबारी सतीश चंद्रा से विवाह हुआशगुन ने पटना विमेंस कॉलेज में 15 वर्षों तक   फैशन और ब्यूटी की फेकल्टी के तौर पर रही है माता रानी मे उनकी असीम आस्था है  विवेकानंद उनके पसंदीदा लेखक है जिनसे वो अपने जीवन मे सबसे अधिक प्रभावित रही है   फिलहाल सक्षम संस्था जो राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगों की सहायता के लिए कार्य कर रही है और  पटना महानगर के उपाध्यक्ष के रूप कार्यान्वित है पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स योगा एरोबिक जैसे कोर्स कुशल निर्देशन में संचालित होते हैं यह पटना विमेंस कॉलेज में  गेस्ट फैकल्टी 15 वर्षों तक अपनी सेवा भी दे चुकी है लेकिन आज भी शगुन कृष्णा की लोकप्रियता छात्राओं के बीच वैसे ही है जैसे पहले होती थी उनकी समाज सेव अनूठी है जब भी कोई जरूरतमंद उनके पास मुश्किल मे आती है तो  वह अपने सेंटर पर  मिडिल क्लास और लोअर क्लास क्लास की लड़कियों महिला हो उनको इस कला को सिखाती है  जो थोड़ी आर्थिक परेशानी मे भी हो वो उनके सेंटर में अपने नए नक्श को जब हुए अच्छे ढंग से सुसज्जित होकर इनके सेंटर से निकलती है और उनके चेहरे पर जो मुस्कान आती है वहीं के लिए सबसे बड़ी पूंजी ऊंची है महिलाओ के बीच मे ये काफी चर्चित कथन है

अच्छा शगुन करना हो तो बस पहले शगुन (शगुन कृष्णा ) के पास चले आओ|

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